Yuva Haryana : हरियाणा और पंजाब भारत के उन क्षेत्रों में शामिल हो गए है, जहां तापमान और हीटवेव की तीव्रता में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। एक नए अध्ययन के मुताबिक यहां गर्मी के दिनों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ अत्यधिक तापमान और लू की घटनाएं भी गंभीर होती जा रही हैं।
यह अध्ययन 1971 से 2022 के बीच के मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर तैयार किया गया है। अध्ययन को International Journal of Climatology में प्रकाशित किया गया है। इसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बदलते तापमान और हीटवेव के रुझानों का अध्ययन किया गया है।
अध्ययन के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के इलाके पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश देश के उन इलाकों में हैं जहां अधिकतम और न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अध्ययन में कहा गया है कि उत्तर-पश्चिम भारत में हीटवेव की घटनाएं अधिक गंभीर और तेजी से बढ़ रही हैं। गर्मी की शुरुआत भी पहले हो रही है और इसका असर लंबे समय तक बना रह रहा है।
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तर-पश्चिम भारत में बढ़ती गर्मी का संबंध जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के पैटर्न से भी जोड़ा जा रहा है।
52 साल के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण
यह अध्ययन Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM) और National Centre for Medium Range Weather Forecasting (NCMRWF) से जुड़े वैज्ञानिकों ने किया है। शोध में 1971 से 2022 तक के तापमान और हीटवेव से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक गर्म दिनों की आवृत्ति और उनकी तीव्रता में वृद्धि हुई है। इसका असर केवल तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती, पानी की उपलब्धता और आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
मानसून से पहले भी बढ़ रही गर्मी
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी का असर अब मानसून से पहले के महीनों में अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण लोगों को लंबे समय तक गर्म मौसम का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार दिन के अत्यधिक तापमान के साथ रात के तापमान में भी बढ़ोतरी देखी गई है। रात में तापमान सामान्य से अधिक रहने पर शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ सकता है।
किसानों और पानी की उपलब्धता पर असर
अध्ययन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि बढ़ती गर्मी का असर कृषि और जल संसाधनों पर पड़ सकता है। तापमान बढ़ने से सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है, जबकि गर्मियों में पानी की उपलब्धता पहले से ही चुनौती बनी रहती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक यदि जल स्रोतों में पानी कम हो और तापमान लगातार अधिक रहे तो कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है।
Heatwave की निगरानी और तैयारी जरूरी
अध्ययन में हीटवेव की बेहतर निगरानी, पूर्व चेतावनी प्रणाली और स्थानीय स्तर पर तैयारी को महत्वपूर्ण बताया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बढ़ते तापमान के प्रभावों को कम करने के लिए मौसम संबंधी जानकारी को कृषि, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन से जोड़ना जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए हीट एक्शन प्लान, गर्मी से बचाव के उपाय और संवेदनशील आबादी की पहचान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?
उत्तर-पश्चिम भारत देश का एक महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र है। यहां तापमान में लगातार बदलाव का असर खेती, बिजली की मांग, पानी की खपत और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे में लंबे समय के मौसम संबंधी आंकड़ों से सामने आ रहे ये रुझान भविष्य की हीटवेव प्रबंधन रणनीतियों और जलवायु अनुकूलन योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

