Yuva Haryana : सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर को लेकर कई दशकों से हरियाणा और पंजाब का विवाद जारी है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख और केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मंगलवार को सुबह साढ़े 9 बजे चंडीगढ़ में आमने-सामने बैठक करेंगे।
यह बैठक हरियाणा निवास में प्रस्तावित है। बैठक को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि कई वर्षों से चला आ रहा यह विवाद निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगा।
आपको बता दें कि इससे पिछली बैठक केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में छह अगस्त को दिल्ली में हुई थी।
इस बैठक में हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी कहा था कि इस मुद्दे पर एक कदम आगे बढ़कर चर्चा हुई है।
वहीं पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा था कि केंद्र सरकार सिंधु और उनकी सहायक नदियों का पानी पंजाब की ओर से डायवर्ट कर दे तो पंजाब न केवल हरियाणा बल्कि राजस्थान को भी पानी दे सकता है।
इसके बाद नवंबर में हुई उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था।
आपको ये भी बता दें कि पिछले छह सालों में छह बैठकें हरियाणा और पंजाब के बीच हो चुकी है, जो कि सभी बेनतीजा ही रही है।
18 अगस्त 2020 और 14 अक्टूबर 2022 को चंडीगढ़ में भगवंत मान और मनोहर लाल के बीच बैठक हुई। इसके बाद 4 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच में बैठक हुई।
28 दिसंबर 2023 को चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्री शेखावत की अध्यक्षता में मनोहर लाल और भगवंत मान की बैठक हुई है।
9 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों में बैठक हुई। 5 अगस्त 2025 को सीएम नायब सैनी और सीएम भगवंत ने बैठक की।
एसवाईएल नहर का मुद्दा लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। हरियाणा सरकार का दावा है कि एसवाईएल के नहीं बनने से हरियाणा को अब तक 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है।
पिछले 45 वर्षों से सिंचाई पानी नहीं मिलने से दक्षिण हरियाणा की 10 लाख एकड़ भूमि बंजर होने के कगार पर है। राज्य को हर साल 42 लाख टन खाद्यान्न का भी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
साल 1981 के समझौते के तहत अगर 1982 में एसवाईएल बन जाती तो हरियाणा 130 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान्नों और दूसरों अनाजों का उत्पादन कर सकता था।
उस समय समझौते के तहत 214 किलोमीटर लंबी एसवाईएल में 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब और 92 किलोमीटर हरियाणा को बनाना था। हरियाणा ने अपना हिस्सा पूरा लिया, जबकि पंजाब ने इस परियोजना पर काम नहीं किया।
जनवरी 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाया और पंजाब से शर्तों के अनुसार नहर बनाने को कहा गया। लेकिन अभी तक पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं की है।



