Yuva Haryana: हरियाणा सरकार राज्य में जमीन के उपयोग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। प्रदेश में विकास योजनाओं और भूमि उपयोग को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार अब विभिन्न क्षेत्रों में अनुमति प्राप्त और प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची तैयार करेगी।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह तय करना है कि आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, कृषि और अन्य क्षेत्रों में कौन-कौन सी गतिविधियां की जा सकेंगी और किन गतिविधियों पर रोक रहेगी। इससे भूमि उपयोग संबंधी विवादों और अनियमितताओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जोनिंग नियमों में बदलाव की तैयारी
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) ने जोनिंग नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत पहले जहां अनुमत गतिविधियों की सूची दी जाती थी, अब विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएगी।
प्रस्ताव को सार्वजनिक सुझावों और आपत्तियों के लिए जारी किया गया है। नागरिक और संबंधित पक्ष 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव विभाग को भेज सकते हैं।
आवासीय क्षेत्रों में इन गतिविधियों पर रोक का प्रस्ताव
प्रस्ताव के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में भारी औद्योगिक गतिविधियों और प्रदूषण फैलाने वाले कार्यों पर रोक लगाने की तैयारी है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- औद्योगिक इकाइयां
- कचरे से बिजली बनाने वाले संयंत्र
- रीसाइक्लिंग यूनिट
- ऑटोमोबाइल स्क्रैप यार्ड
- भारी गोदाम और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां
- खतरनाक रसायनों से जुड़े उद्योग
व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए भी अलग नियम
व्यावसायिक क्षेत्रों में होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, कार्यालय, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों जैसी गतिविधियों को अनुमति मिल सकती है, जबकि भारी उद्योगों और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
इससे व्यापारिक गतिविधियों और शहरी विकास को बेहतर ढंग से व्यवस्थित किया जा सकेगा।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी तय होगी गतिविधियों की सीमा
औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन और विनिर्माण गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि ऐसे उद्योगों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी जो पर्यावरण या सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
सरकार विभिन्न उद्योगों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी में है ताकि भूमि उपयोग को लेकर भविष्य में कोई भ्रम न रहे।
सार्वजनिक सुझावों के बाद होगा अंतिम निर्णय
विभाग ने प्रस्ताव को सार्वजनिक डोमेन में जारी कर दिया है और लोगों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद प्राप्त सुझावों की समीक्षा की जाएगी और फिर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शहरी और ग्रामीण विकास को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ अनियोजित निर्माण और भूमि उपयोग विवादों को कम करने में मदद करेगा।

