Yuva Haryana: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने की योजना में लापरवाही सामने आई है। निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद हरियाणा के पेट्रोल पंपों पर कैमरे नहीं लगाए जाने के मामले में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में हरियाणा के परिवहन सचिव और आयुक्त को समन जारी कर 16 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
आयोग की इस कार्रवाई से हरियाणा परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। यह मामला दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किए जा रहे उपायों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी से जुड़ा है।
2,780 पेट्रोल पंपों पर लगाए जाने थे ANPR कैमरे
दिल्ली-NCR क्षेत्र में स्थित 2,780 पेट्रोल पंपों पर 30 सितंबर तक ANPR कैमरे लगाए जाने थे। इन कैमरों का उद्देश्य वाहनों की नंबर प्लेट की पहचान कर उनकी निगरानी करना है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
ANPR तकनीक की मदद से वाहनों की नंबर प्लेट को स्वचालित तरीके से पढ़ा जा सकता है। इससे संबंधित अधिकारियों को नियमों के अनुपालन की जांच करने और निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
इस व्यवस्था को लागू करने का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे वाहनों को लेकर निगरानी बढ़ाना है, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं है। निर्धारित नियमों के तहत ऐसे वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने में भी कैमरों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, निर्धारित समय सीमा तक कैमरे नहीं लगाए जाने के कारण इस व्यवस्था को लागू करने में देरी हुई है।
समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
आयोग ने 1 अक्टूबर की समय सीमा का पालन नहीं होने पर गंभीर चिंता जताई है। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी एक भी कैमरा शुरू नहीं हो सका था। इससे योजना के क्रियान्वयन में हुई देरी और संबंधित विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े हुए हैं।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग दिल्ली-NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न उपायों की निगरानी करता है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में कैमरा प्रणाली को समय पर लागू नहीं किया जाना आयोग के लिए गंभीर विषय बन गया है।
परिवहन सचिव और आयुक्त को 16 अक्टूबर को पेश होने के निर्देश
कैमरे लगाने में देरी के मामले में आयोग ने हरियाणा के परिवहन सचिव और आयुक्त को समन जारी किया है। दोनों अधिकारियों को 16 अक्टूबर को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
इस कार्रवाई के जरिए आयोग संबंधित अधिकारियों से यह जानना चाहता है कि निर्धारित समय सीमा के बावजूद योजना को लागू क्यों नहीं किया जा सका। साथ ही, यह मामला विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने से भी जुड़ा है।
आयोग की कार्रवाई से स्पष्ट है कि पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े निर्देशों के पालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है।
नियमों का उल्लंघन करने पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
आयोग के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े ने स्पष्ट किया कि यदि अधिकारी संतोषजनक कारण और ठोस कार्ययोजना के साथ उपस्थित नहीं होते हैं, तो आयोग एकतरफा सुनवाई कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है।
निर्देशों का पालन नहीं करने पर विभागाध्यक्ष और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ पांच साल तक की जेल, एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। हालांकि, यह कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रावधानों और मामले की परिस्थितियों के अनुसार होगी।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए तकनीकी निगरानी जरूरी
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती है। वाहनों से होने वाला उत्सर्जन इस समस्या के प्रमुख कारणों में शामिल है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों की जांच, वाहनों की नियमित निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे लगाने की योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो वाहनों की पहचान और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों की निगरानी अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
अब इस मामले में 16 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। संबंधित अधिकारियों के जवाब और आयोग के अगले निर्देशों से यह स्पष्ट होगा कि कैमरे लगाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने तथा जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

