मनीषा ने आत्महत्या की थी या हत्या हुई? CBI की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती, 28 अक्टूबर को आएगा फैसला
Yuva Haryana: हरियाणा के भिवानी की शिक्षिका मनीषा की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली परिजनों की याचिका पर पंचकूला स्थित विशेष अदालत में करीब चार घंटे तक बहस चली। CBI ने अपनी जांच के आधार पर मनीषा की मौत को आत्महत्या बताया है, जबकि परिजन इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं। उन्होंने जांच की प्रक्रिया, सुसाइड नोट की कथित लिखावट और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। अब इस मामले में अदालत का फैसला 28 अक्टूबर 2026 को आने की उम्मीद है।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट को परिजनों ने दी चुनौती
मनीषा की मौत के मामले में CBI ने जांच पूरी करने के बाद क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश की थी। रिपोर्ट में मौत को आत्महत्या बताया गया। इसके बाद मनीषा के परिजनों ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए अदालत का रुख किया।
परिवार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों ने कहा कि मौत की परिस्थितियों, सुसाइड नोट की लिखावट और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की गहराई से जांच होनी चाहिए थी।
मनीषा के परिजनों के वकील हर्ष मोहन ने जांच की प्रक्रिया और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग, एफएसएल रिपोर्ट तथा घटनास्थल से जुड़े तथ्यों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि केवल आत्महत्या की आशंका के आधार पर मामले को बंद करने के बजाय सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सुसाइड नोट की लिखावट पर उठे सवाल
इस मामले में सुसाइड नोट की कथित लिखावट एक अहम मुद्दा बन गई है। परिजनों के वकील के अनुसार, मनीषा के परिजनों ने सुसाइड नोट की लिखावट को लेकर संदेह जताया है। उनका दावा है कि लिखावट का मिलान नहीं होने से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सुसाइड नोट की लिखावट को लेकर संदेह था, तो जांच के दौरान इस पहलू को किस तरह परखा गया। अदालत में इन दलीलों के आधार पर CBI की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी गई।
हालांकि, लिखावट को लेकर उठाए गए सवाल और परिवार के दावे अपने आप में यह साबित नहीं करते कि मनीषा की हत्या हुई थी। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
जहर और गर्दन पर निशान को लेकर भी सवाल
परिजनों ने मनीषा की मौत से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच में जहर और गर्दन पर मिले निशानों जैसे बिंदुओं को पूरी गंभीरता से देखा जाना चाहिए था।
परिवार की ओर से यह दलील दी गई कि इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मौत की परिस्थितियों का दोबारा मूल्यांकन किया जाना चाहिए। परिजनों ने अदालत से आग्रह किया कि CBI की रिपोर्ट को स्वीकार करने से पहले जांच के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जाए।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट और परिवार की आपत्तियों के बीच अब अदालत का रुख महत्वपूर्ण हो गया है। 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई या फैसले से मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
अगस्त 2025 में मिला था मनीषा का शव
मनीषा 11 अगस्त 2025 को भिवानी जिले के दानी लक्ष्मणवास गांव से लापता हुई थीं। दो दिन बाद, 13 अगस्त को उनका शव नहर के पास मिला था। शव की स्थिति को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए और हत्या की आशंका जताई थी।
इसके बाद मामले की जांच की गई। परिवार ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर असंतोष जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। बाद में CBI ने जांच के आधार पर मौत को आत्महत्या बताया और क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की।
28 अक्टूबर के फैसले पर टिकी नजरें
मनीषा की मौत का मामला अब अदालत में CBI की क्लोजर रिपोर्ट और परिजनों की आपत्तियों के बीच आगे बढ़ रहा है। एक ओर जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में आत्महत्या का निष्कर्ष दिया है, वहीं दूसरी ओर परिवार इस निष्कर्ष को चुनौती दे रहा है।
अब 28 अक्टूबर 2026 को अदालत का फैसला महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत क्या रुख अपनाती है और मामले में आगे किसी अतिरिक्त जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई की जरूरत मानी जाती है या नहीं। तब तक हत्या या आत्महत्या को लेकर किसी भी निष्कर्ष को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।

