Yuva Haryana : दिल्ली कार ब्लास्ट मामले के तार हरियाणा के फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ने के बाद यह विश्वविद्यालय चर्चा का विषय बना हुआ है। धौज स्थित चहल पहल वाले इस विश्वविद्यालय में अब सन्नाटा पसरने लगा है। हालांकि, दिन भर जांच एजेंसियों की गाडियां तो पूछताछ व रिकॉर्ड जुटाने के लिए यहां जरूर पहुंचती है।
दरअसल, ताजा माहौल के चलते अब विद्यार्थियों को लेने के लिए हर दिन उनके अभिभावक यहां आ रहे है और छुट्टी दिलाकर अपने बच्चों को वापस घर ले जाने का सिलसिला जारी है। साथ ही ग्रामीण अब विश्वविद्यालय में बने अस्पताल में आने से कतराने लगे है। ऐसे हालात में यूनिवर्सिटी ने ओपीडी भी बंद कर दी है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस विद्यार्थियों का कहना है कि अल फलाह में दाखिला हुआ तो उन्हें लगा कि जैसे डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो गया है, लेकिन यूनिवर्सिटी का नाम आतंकी डॉक्टरों के साथ जुड़ने के बाद अब तो यह बताने से भी डर लगता है कि वे इस संस्थान में पढ़ाई कर रहे है।
छात्रों का कहना है कि बाहर के लोग उन्हें और स्टाफ को संदेह की नजर से देखने लगे है। ऐसे हालात में हमने यहां से डिग्री ले भी ली तो सारी उम्र इस यूनिवर्सिटी का नाम हमारा पीछा नहीं छोड़ने वाला। ऐसे में छात्रों को अपने भविष्य की खासा चिंता सता रही है।
आपको यह भी बता दें कि अल फलाह यूनिवर्सिटी का अस्पताल आसपास के करीब 20 गांवों के लिए एम्स की तरह है और यहां मुफ्त इलाज मिलता है। अब परिसर के अंदर जाने के लिए किसी अनजान व्यक्ति की तीन जगह चेकिंग की जाने लगी है और उसके बाद अनजान को अंदर जाने दिया जा रहा है।
शहर से 18 किलोमीटर दूर सुनसान जगह पर बनाई गई अल फलाह फरीदबाद की सबसे बड़ी मेडिकल यूनिवर्सिटी है। यहां एमबीबीएस की 150 सीटें है। पूरे शहर में इस यूनिवर्सिटी के विज्ञापन का एक बोर्ड तक नहीं लगा है। केवल रोड पर ही एक पुराना बोर्ड लगा है, जिसमें भी नाम सही से दिखाई नहीं देता।
इस बीच शुक्रवार को इस अल फलाह के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की मान्यता रद्द और बंद करने की अफवाह भी फैली थी। उधर, हरियाणा सरकार यूनिवर्सिटी को दी गई सभी मान्यताओं की समीक्षा करने की बात कह रही है। इस पर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का कहना है कि फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और जांच पूरी होने के बाद ही सरकार किसी भी मान्यता को रद्द करने जैसे कदम पर अंतिम फैसला लेगी।
उन्होंने कि हरियाणा सरकार का ये भी प्रयास रहेगा कि कार्रवाई से यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित ना हो, इसलिए हर कदम सोच-समझ कर लिया जाएगा।
वहीं अल फलाह यूनिवर्सिटी और उसके संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी भी सवालों के घेरे में हैं। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईडी को संस्था से जुड़े लेन देन के मामलों की जांच करने को कहा गया है, क्योंकि अहमद सिद्दीकी अपने कारपोरेट नेटवर्क और पुराने आपराधिक मामलों को लेकर शक के दायरे में है।
सवाल ये भी उठ रहे है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने कश्मीर से बर्खास्त दो डॉक्टरों को कैसे बिना जांच के नौकरी पर रखा?इस यूनिवर्सिटी ने आतंकी गतिविधियों में साल 2023 में लिप्त पाए जाने के बाद डॉ. नासिर को नौकरी पर रखा और दिल्ली ब्लास्ट करने वाले डॉ. उमर को अनंतनाग के हॉस्पिटल से बर्खास्त किए जाने के बावजूद अल फलाह में नौकरी दी।



