Yuva Haryana: हाल के बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों के बाद पंचकूला नगर निगम (MC) ने जनता के पैसों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। नगर निगम ने अपने पास उपलब्ध फंड में से ₹80 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) निजी बैंकों के बजाय सरकारी बैंकों में जमा कर दी है।
कम ब्याज, अधिक सुरक्षा: निजी बैंक 8% से अधिक का ब्याज दे रहे थे, जबकि सरकारी बैंक 7% से 7.5% का ब्याज दे रहे हैं। निगम ने अधिक रिटर्न की जगह सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
24 बैंकों से मंगवाए गए थे रेट: नगर निगम ने 24 पैनलबद्ध सरकारी और निजी बैंकों से ब्याज दर, लिक्विडिटी, स्वीप-इन/स्वीप-आउट और प्री-मैच्योर निकासी की शर्तों के विवरण मांगे थे।
पहले की नीतियां: सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार विभाग अधिकतम रिटर्न वाले बैंकों में फंड रखते थे, लेकिन सार्वजनिक धन को जोखिम में न डालने के उद्देश्य से इस नीति में बदलाव किया गया है।
किन मामलों के बाद लिया गया यह फैसला?
नगर निगम का यह कदम हाल ही में सामने आए दो बड़े मामलों के बाद आया है:
- IDFC फर्स्ट बैंक मामला: लगभग ₹593 करोड़ के फंड में हेरफेर और दुरुपयोग का मामला सामने आया था, जिसकी जांच हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो कर रहा है। इसमें पंचकूला नगर निगम सहित 18 विभागों के फंड शामिल थे (बाद में राशि बहाल कर दी गई)।
- कोटक महिंद्रा बैंक गड़बड़ी: नगर निगम की 16 फिक्स्ड डिपॉजिट्स (मूल्य ₹145 करोड़ से अधिक, मैच्योरिटी वैल्यू ₹158 करोड़) के रिकॉर्ड में अनियमितताएं पाई गईं। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार लगभग पूरी राशि वापस पा ली गई है।
साइड स्टोरी: मेयर की 10 एड-हॉक कमेटियों की वैधता पर जेजेपी ने उठाए सवाल
जेजेपी (Jannayak Janta Party) ने पंचकूला के मेयर शाम लाल बंसल द्वारा गठित 10 एड-हॉक कमेटियों का विरोध किया है। जेजेपी जिलाध्यक्ष ओ.पी. सिहाग का आरोप है कि ये कमेटियां हरियाणा नगर निगम अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करके बनाई गई हैं। उन्होंने दावा किया कि निगम हाउस की मंजूरी के बिना बनाई गई इन कमेटियों की कोई कानूनी वैधता नहीं है और इन्हें सदन में चर्चा के बाद दोबारा गठित किया जाना चाहिए।

