Yuva Haryana: हरियाणा सरकार राज्य में मापतौल और पैकेज्ड (डिब्बाबंद) वस्तुओं में होने वाली गड़बड़ी और घटतौली को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ने मापतौल के उपकरणों, मशीनों के निर्माण, बिक्री और वस्तुओं के मापदंडों में होने वाले उल्लंघन पर लगने वाले जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया है। यह संशोधन लगभग 15 साल बाद (2011 के नियमों के बाद) किया जा रहा है।
खाद्य एवं पूर्ति विभाग के डिप्टी डायरेक्टर निशांत राठी के अनुसार, विभाग ने इस संबंध में नया ड्राफ्ट जारी कर दिया है और 7 दिनों के भीतर आम जनता एवं हितधारकों से आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं। इसे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिसके तहत अब ‘लाइसेंस’ की जगह ‘पंजीकरण’ (Registration) शब्द का उपयोग किया गया है।
नए ड्राफ्ट में क्या हैं मुख्य प्रावधान?
नए नियमों के तहत उल्लंघनकर्ताओं पर जुर्माने की रकम को 1 हजार – 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा तीसरी बार उल्लंघन करने पर मामला सीधे कोर्ट जाएगा।
- डिब्बाबंद (Packaged) सामग्री के तोल में गड़बड़ी
यदि पैकेट/डिब्बे पर लिखे विवरण के अनुसार सामग्री नहीं मिलती है, तो संबंधित कंपनी पर अधिकतम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा।
फेरीवालों (Street Vendors) द्वारा तीसरी बार ऐसा उल्लंघन करने पर 25 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा।
- बाट और माप में परिवर्तन/छेड़छाड़ करने पर
फेरीवाले: पहली बार 5,000 रु., दूसरी बार 10,000 रु. और तीसरी बार में मामला कोर्ट जाएगा।
कंपनी/विभाग/प्राधिकरण: पहली बार 50,000 रु., दूसरी बार 1 लाख रु. और तीसरी बार में मामला कोर्ट जाएगा।
- गलत बाट-माप रखने और इस्तेमाल करने पर
गलत बाट रखने पर: फेरीवाले को पहली बार सुधार का नोटिस मिलेगा। दूसरी बार में 2,500 रुपये और तीसरी बार में 2 लाख रुपये जुर्माना।
सरकारी विभाग व निकाय: पहली बार नोटिस, दूसरी बार 1 लाख रु. और तीसरी बार 3 लाख रु. का जुर्माना।
असत्यापित (Unverified) बाट-माप इस्तेमाल करने पर: फेरीवाले पर 2,000 रुपये और अन्य (कंपनियों/व्यापारियों) पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। दूसरी बार उल्लंघन करने पर कोर्ट में जुर्माना भरना पड़ेगा।
- पंजीकरण (Registration) और दस्तावेजों से जुड़े नियम
बिना रजिस्ट्रेशन/प्रमाण पत्र मापतौल का निर्माण या मरम्मत: 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
पंजीकरण प्रमाण पत्र से छेड़छाड़ करने पर: 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
रजिस्ट्रेशन दस्तावेज न दिखाने पर: पहली बार नोटिस। दूसरी बार 5 हजार रुपये और तीसरी बार 50 हजार से 1 लाख रुपये जुर्माना।
गलत सूचना देने पर: 1,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना।
ध्यान दें: 2011 के पुराने नियमों में हर उल्लंघन पर पहली बार में ही जुर्माना लग जाता था। हालांकि, नए ड्राफ्ट के अनुसार ज़्यादातर मामलों में पहली बार सुधार के लिए नोटिस दिया जाएगा और दूसरी या तीसरी बार गलती दोहराने पर जुर्माना व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

