सोनीपत में घी फैक्ट्री पर सीएम फ्लाइंग की छापेमारी, 660 लीटर घी सील; 4 ब्रांड के सैंपल लिए
Yuva Haryana: हरियाणा के सोनीपत जिले के खरखौदा में घी की गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री उड़नदस्ता (सीएम फ्लाइंग) और खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक फैक्ट्री पर छापेमारी की। टीम ने सोनीपत मार्ग पर जियो पेट्रोल पंप के पीछे चल रही घी फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस दौरान मौके पर अलग-अलग ब्रांड के हजारों लीटर घी और एक टैंक में करीब 750 लीटर अतिरिक्त घी मिला। अधिकारियों ने चार ब्रांड के नमूने लेकर जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की। वहीं, श्रीकृष्णा और डेनमार्क ब्रांड का कुल 660 लीटर घी सील किया गया।
फैक्ट्री में मिले चार ब्रांड के हजारों लीटर घी
निरीक्षण के दौरान टीम को फैक्ट्री में चार अलग-अलग ब्रांड का घी मिला। इनमें सरस ब्रांड का 3,575 लीटर, डेनमार्क ब्रांड का 300 लीटर, प्रवेश ब्रांड का 585 लीटर और श्रीकृष्णा ब्रांड का 360 लीटर घी शामिल है। इसके अलावा फैक्ट्री में रखे टैंक में करीब 750 लीटर घी भी मिला।
अधिकारियों ने चारों ब्रांड के नमूने लिए, जिन्हें गुणवत्ता की जांच के लिए करनाल स्थित खाद्य प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही घी की गुणवत्ता और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
फैक्ट्री में घी बनाने और पैकिंग की मशीनें भी मिलीं
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्री में घी तैयार करने और पैकिंग करने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनों का भी निरीक्षण किया। मौके पर घी को गर्म करने, साफ करने और अलग-अलग ब्रांड के नाम से पैक करने की व्यवस्था मिली।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम का नेतृत्व सोनीपत के खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह ने किया। उनके साथ सीएम फ्लाइंग की टीम भी मौजूद रही। अधिकारियों ने फैक्ट्री में उपलब्ध दस्तावेजों और लाइसेंस की जांच की।
2020 में शुरू की थी फैक्ट्री
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री संचालक प्रदीप ने टीम को बताया कि उसने वर्ष 2020 में फैक्ट्री शुरू की थी। उसने खुद को फैक्ट्री का मालिक बताया। संचालक के अनुसार, वह अलग-अलग स्थानों से मक्खन और घी खरीदता है। इसके बाद मशीनों के माध्यम से उसकी सफाई और गर्म करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। फिर तैयार उत्पाद को अलग-अलग ब्रांड के नाम से पैक करके बाजार में बेचा जाता है।
फैक्ट्री संचालक ने अधिकारियों को अपना लाइसेंस भी दिखाया। उसके मुताबिक, लाइसेंस 10 फरवरी 2027 तक वैध है। टीम ने निरीक्षण के दौरान लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की।
लैब रिपोर्ट के बाद साफ होगी घी की गुणवत्ता
खाद्य सुरक्षा विभाग ने चार ब्रांड के नमूने लेकर जांच के लिए भेजने की तैयारी की है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट से पता चलेगा कि घी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। यदि जांच में किसी तरह की मिलावट या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब हरियाणा सरकार ने त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने घी के नाम पर बेचे जाने वाले उत्पादों की निगरानी और खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
पहले भी सामने आ चुके हैं मिलावटी घी के मामले
सोनीपत जिले में घी की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। जून 2026 में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दिल्ली और हरियाणा में कथित नकली घी के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस दौरान 6,500 लीटर से अधिक संदिग्ध घी और कच्चा माल जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच में कुछ नमूनों में वनस्पति तेल और अन्य गैर-डेयरी तत्व मिलने की बात भी कही गई थी।
खाद्य सुरक्षा विभाग की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य बाजार में बिकने वाले घी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। फिलहाल खरखौदा की फैक्ट्री से लिए गए नमूनों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि संबंधित ब्रांड के घी में कोई गड़बड़ी पाई गई है या नहीं।

