हरियाणा में लाल डोरा की जमीन बेचने पर लगेगा स्टांप शुल्क, मालिकाना हक मिलने के बाद बदलेंगे नियम
Yuva Haryana: हरियाणा में लाल डोरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों को लेकर सरकार की ओर से किए जा रहे बदलावों का असर अब जमीन और मकान मालिकों पर भी दिखाई देगा। स्वामित्व योजना के तहत जिन लोगों को लाल डोरा क्षेत्र में अपनी संपत्ति का मालिकाना हक मिला है, उन्हें अब संपत्ति की खरीद-बिक्री के दौरान निर्धारित नियमों और शुल्क का पालन करना होगा। लाल डोरा में मिली मालिकाना हक वाली जमीन बेचने पर स्टांप शुल्क देना होगा। इससे संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज हो सकेगी।
क्या है लाल डोरा और क्यों शुरू हुई स्वामित्व योजना ?
लाल डोरा व्यवस्था अंग्रेजों के समय से चली आ रही है। इसके तहत गांव की आबादी वाले क्षेत्र को लाल रंग की रेखा से चिह्नित किया जाता था। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मकान और प्लॉट लंबे समय तक पारंपरिक राजस्व रिकॉर्ड में कृषि भूमि की तरह दर्ज नहीं होते थे। ऐसे में लोगों के पास अपनी संपत्ति पर कब्जे के प्रमाण तो होते थे, लेकिन कानूनी मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेजों की कमी रहती थी।
इस समस्या को दूर करने के लिए हरियाणा सरकार ने वर्ष 2019 में लाल डोरा मुक्त योजना की शुरुआत की थी। बाद में केंद्र सरकार ने भी स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के माध्यम से इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया। इसके तहत ड्रोन तकनीक से गांवों की आबादी देह का सर्वे किया गया और संपत्तियों की पहचान करके मालिकाना हक के दस्तावेज तैयार किए गए।
25 लाख से अधिक संपत्तियों के तैयार हुए मालिकाना रिकॉर्ड
हरियाणा में स्वामित्व योजना के तहत बड़े स्तर पर सर्वे और रिकॉर्ड तैयार करने का काम किया गया। केंद्र सरकार के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, प्रदेश के 6,249 लाल डोरा गांवों की ड्रोन मैपिंग पूरी की गई थी। 10 जनवरी 2025 तक 25,16,190 संपत्तियों के मालिकाना रिकॉर्ड अंतिम रूप से तैयार किए जा चुके थे। इनमें से 25,16,107 संपत्ति कार्ड वितरित किए जा चुके थे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि तक लगभग 4.93 लाख संपत्तियों का पंजीकरण भी पोर्टल पर अपलोड किया गया था। इससे स्पष्ट है कि योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया गया है।
जमीन बेचने पर स्टांप शुल्क क्यों जरूरी?
मालिकाना हक मिलने के बाद लाल डोरा क्षेत्र की संपत्ति भी कानूनी और वित्तीय दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अब संपत्ति मालिक अपनी जमीन या मकान का हस्तांतरण करने, खरीद-बिक्री करने और बैंक से ऋण लेने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
संपत्ति का हस्तांतरण होने पर सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करना जरूरी होता है। इसके लिए लागू पंजीकरण प्रक्रिया और स्टांप शुल्क संबंधी नियमों का पालन करना पड़ता है। स्टांप शुल्क सरकार के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है।
हालांकि, स्टांप शुल्क की वास्तविक राशि संपत्ति के प्रकार, स्थान, मूल्य और लागू सरकारी अधिसूचनाओं के आधार पर तय होती है। इसलिए किसी भी लेनदेन से पहले संबंधित तहसील या उप-पंजीयक कार्यालय से शुल्क की पुष्टि करना जरूरी होगा।
राजस्व विभाग को मिलेगी रिकॉर्ड की जिम्मेदारी
लाल डोरा संपत्तियों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए राजस्व विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। संपत्तियों की पहचान, सर्वे, दस्तावेजों का सत्यापन और मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट करना इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है। पटवारियों और संबंधित सर्वे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी भूमि रिकॉर्ड को सही रखने में महत्वपूर्ण रहेगी।
हरियाणा सरकार ने 28 जुलाई 2026 को हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितकरण, अभिलेखीकरण एवं समाधान) नियम-2026 को मंजूरी दी थी। इन नियमों का उद्देश्य लाल डोरा क्षेत्र की संपत्तियों के स्थायी रिकॉर्ड तैयार करना और मालिकाना हक से जुड़े विवादों के समाधान के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाना है।
ग्रामीणों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के दस्तावेज सुरक्षित रखने, कानूनी रूप से खरीद-बिक्री करने और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।
हालांकि, संपत्ति बेचने से पहले मालिकों को अपने स्वामित्व प्रमाण पत्र, संपत्ति पहचान संख्या और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए। साथ ही संबंधित तहसील कार्यालय से स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन की मौजूदा प्रक्रिया की जानकारी लेना भी जरूरी है।
इस तरह लाल डोरा क्षेत्र की संपत्तियों को व्यवस्थित राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया ग्रामीणों को कानूनी सुरक्षा देने के साथ-साथ प्रदेश की भूमि प्रशासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

