Yuva Haryana : हरियाणा में जाट आंदोलन की आग ठंडी पड़े बहुत साल बीत गए है, लेकिन वर्ष 2016 में हुए इस आंदोलन से जुड़े अनेक मामले आज भी अदालतों में सुलझने के लिए उलझे हुए है।
दरअसल, जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़ा मुरथल सामूहिक दुष्कर्म और प्रदेशभर में हुई हिंसा की घटनाओं को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है।
मामला में नया अपडेट क्या ?
- HC ने आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर हरियाणा सरकार से मांगा जवाब
- 10 नवंबर तक केसों की अपडेट देने के आदेश
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछते हुए कहा है कि इस मामले में अब तक कितने केस दर्ज किए गए है और इन केसों की वर्तमान स्थिति क्या है? हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगते हुए पूछा कि कितने मामलों में सजा हो चुकी है और कितनों का ट्रायल चल रहा है?
पिछले 9 साल से ये मामले विचाराधीन है। ऐसे में हाई कोर्ट की अगली सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार का पक्ष सुना जाएगा और यह फैसला भी लिया जाएगा कि इस जनहित याचिका पर आगे सुनवाई की जरूरत है या नहीं ?
वहीं हरियाणा सरकार को इन सभी मामलों की ट्रायल की स्थिति पर भी पक्ष रखना होगा।
आपको बता दें कि पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी से केसों की स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी, जिसे हाईकोर्ट में पेश कर दिया गया है।
हाईकोर्ट को बताई गई बड़ी बातें
- हिंसा से जुड़े 2105 केस है
- इनमें से सरकार 407 केस वापस लेना चाहती
आपको बता दें कि सभी पक्षों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया था कि एक एसआईटी 2000 के करीब मामलों की जांच कैसे कर सकती है?
इसके बाद कोर्ट मित्र ने अदालत को बताया था कि कुछ समय से हरियाणा सरकार जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट नेताओं पर दर्ज मामले वापस लेने पर विचार कर रही थी और संभावना थी कि इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार अर्जी दायर कर कोर्ट से इसके लिए इजाजत लेगी। इसी कारण यह देरी हुई है।
एक समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक आंदोलन के दौरान वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर पर तोड़फोड़ व वाहनों को जलाने के आरोपी दिलावर सिंह ने जमानत याचिका दायर की थी। उसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी आदेश दे चुका है। शीर्ष कोर्ट ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में दिसंबर 2018 तक केसों का ट्रायल पूरा करने के आदेश दिए थे लेकिन उसके बावजूद ट्रायल पूरा नहीं हो पाया।
इस मामले में कोर्ट ने सीबीआई को ट्रायल कोर्ट में चल रहे मामलों के स्टेटस की जानकारी हाईकोर्ट को दिए जाने के आदेश दिए थे। साथ ही पूछा था कि वह बताएं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ट्रायल पूरा किए जाने में देरी क्यों हो रही है? क्या इस देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई अर्जी दायर कर और समय की मांग की है या नहीं। फरवरी 2019 के बाद इस मामले में हाईकोर्ट में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो पाई।



