हरियाणा में 3.64 लाख लोग अब भी निरक्षर, सिरसा और नूंह की स्थिति सबसे खराब; शिक्षा विभाग ने दिए सख्त निर्देश
Yuva Haryana: हरियाणा में शिक्षा को बढ़ावा देने और निरक्षर लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए चलाए जा रहे ‘उल्लास’ यानी नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रदेश में 3 लाख 64 हजार 539 लोग अभी भी साक्षरता अभियान के निर्धारित लक्ष्य के दायरे में बाकी हैं। खास बात यह है कि सिरसा और नूंह जैसे जिलों में अभियान की प्रगति अपेक्षा से काफी धीमी है। इस स्थिति पर विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने नाराजगी जताते हुए जिला स्तर के अधिकारियों को पंजीकरण और लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में 10 लाख शिक्षार्थियों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 30 अक्टूबर 2026 तक उल्लास पोर्टल पर 7,21,689 लोगों का पंजीकरण हो चुका था, जबकि सितंबर 2026 में आयोजित परीक्षा में 6,35,461 शिक्षार्थी शामिल हुए। मार्च 2027 में होने वाली अगली परीक्षा के लिए 3,64,539 का लक्ष्य शेष बताया गया है।
11 नवंबर तक पंजीकरण पूरा करने के निर्देश
अभियान की धीमी रफ्तार को देखते हुए विद्यालय शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक (साक्षरता) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को 11 नवंबर 2026 तक लंबित पंजीकरण कार्य पूरा करने को कहा गया है।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जिन जिलों में प्रदर्शन कमजोर रहेगा, वहां संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी और जिला गणित विशेषज्ञ की जवाबदेही तय होगी। निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
विभाग का जोर केवल पोर्टल पर नाम दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजीकृत शिक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल कराकर उन्हें बुनियादी पढ़ने, लिखने और गणित की जानकारी देना भी अभियान का अहम हिस्सा है।
सिरसा और नूंह में सबसे ज्यादा काम बाकी
जिला स्तर के आंकड़ों पर नजर डालें तो सिरसा में मार्च 2027 की परीक्षा के लिए 40,894 शिक्षार्थियों का लक्ष्य अभी बाकी है। नूंह में यह संख्या 38,189 है। इसके अलावा फरीदाबाद में 29,025, जींद में 27,686 और हिसार में 26,857 का लक्ष्य शेष है।
दूसरी ओर कुछ जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। अंबाला में केवल 511, कुरुक्षेत्र में 2,557 और पंचकूला में 2,661 का लक्ष्य बाकी बताया गया है। चरखी दादरी में 3,431 और कैथल में 6,260 शिक्षार्थियों का लक्ष्य शेष है।
महेंद्रगढ़ जिले में 2026-27 के लिए 34,780 लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया था। यहां 24,090 लोगों का पंजीकरण हुआ और 23,632 शिक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। इसके बावजूद 11,148 का लक्ष्य अभी पूरा किया जाना बाकी है।
2011 की जनगणना में करीब 50 लाख लोग थे निरक्षर
हरियाणा में निरक्षरता की चुनौती कितनी बड़ी रही है, इसका अंदाजा 2011 की जनगणना के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। उस समय प्रदेश में कुल 49,94,133 लोग निरक्षर दर्ज किए गए थे। यानी करीब 50 लाख लोगों को पढ़ने-लिखने की बुनियादी जानकारी नहीं थी।
शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्ष 2018 तक पूर्ववर्ती ‘साक्षर भारत’ योजना के तहत प्रदेश के 10 जिलों में 7,81,218 लोगों को साक्षरता प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके थे। अब उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से शेष वयस्कों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या है उल्लास कार्यक्रम?
उल्लास यानी नव भारत साक्षरता कार्यक्रम केंद्र सरकार की योजना है। इसका उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों को बुनियादी शिक्षा देना है, जो किसी कारणवश औपचारिक स्कूली शिक्षा हासिल नहीं कर पाए। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप चलाया जा रहा है।
इसमें पढ़ने-लिखने और गणित की बुनियादी जानकारी के साथ डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, कानूनी जागरूकता, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े जरूरी कौशल भी सिखाए जाते हैं। योजना में स्वयंसेवकों की मदद से शिक्षार्थियों को पढ़ाया जाता है। इसके लिए डिजिटल सामग्री, उल्लास ऐप और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग किया जाता है।
प्रशिक्षण के बाद शिक्षार्थियों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी असेसमेंट टेस्ट (FLNAT) में शामिल कराया जाता है। परीक्षा में सफल होने वाले लोगों को प्रमाणपत्र दिया जाता है।
लक्ष्य पूरा करने के लिए जिलों पर बढ़ा दबाव
हरियाणा में उल्लास अभियान के आंकड़े बताते हैं कि पंजीकरण और परीक्षा में भागीदारी बढ़ने के बावजूद अभी काफी काम बाकी है। विशेष रूप से सिरसा, नूंह, फरीदाबाद और जींद जैसे जिलों में लक्ष्य पूरा करना शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
अब जिला अधिकारियों को 11 नवंबर तक पंजीकरण प्रक्रिया तेज करने और मार्च 2027 की परीक्षा के लिए शिक्षार्थियों को तैयार करने पर ध्यान देना होगा। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने निरक्षर वयस्क वास्तव में पढ़ना-लिखना सीखकर परीक्षा पास कर पाते हैं।

