एग्रीस्टैक आईडी से ई-भूमि पोर्टल पर होगा पंजीकरण, खेत में खड़ी फसल की फोटो भी कर सकेंगे अपलोड
Yuva Haryana: हरियाणा में रबी सीजन के दौरान किसानों को फसल सत्यापन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है। राज्य सरकार फसल पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत किसान अपनी एग्रीस्टैक आईडी के माध्यम से ई-भूमि पोर्टल पर खेतों में बोई गई फसलों का विवरण दर्ज कर सकेंगे। किसान अपनी फसल की तस्वीर भी अपलोड कर सकेंगे, जिससे फसल के रिकॉर्ड का सत्यापन आसान बनाने में मदद मिलेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य फसल के वास्तविक रकबे और पोर्टल पर दर्ज जानकारी के बीच अंतर यानी मिसमैच की समस्या कम करना है। इससे मंडियों में फसल बेचते समय किसानों को होने वाली परेशानियां घटने और सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की उम्मीद है।
किसान खुद दर्ज कर सकेंगे फसल का विवरण
नई व्यवस्था में किसान अपने खेत में बोई गई फसल की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए एग्रीस्टैक के तहत बनी किसान आईडी का इस्तेमाल किया जाएगा। किसान को फसल का विवरण, खेत और संबंधित भूमि की जानकारी दर्ज करनी होगी। साथ ही, किसान खेत में खड़ी फसल की तस्वीर भी अपलोड कर सकेंगे।
इस प्रक्रिया से फसल सत्यापन के लिए कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने और किसानों को अपनी जानकारी स्वयं अपडेट करने की सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, पंजीकरण और सत्यापन की अंतिम प्रक्रिया संबंधित विभाग के निर्धारित नियमों के अनुसार ही पूरी होगी।
मिसमैच की समस्या से मिलेगी राहत
फसल पंजीकरण के दौरान कई बार पोर्टल पर दर्ज जानकारी और खेत में वास्तव में बोई गई फसल के बीच अंतर सामने आता है। ऐसी स्थिति में सत्यापन में देरी हो सकती है और किसान को मंडी में अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नई डिजिटल व्यवस्था से किसान समय रहते अपनी फसल का विवरण दर्ज कर सकेंगे। इससे राजस्व रिकॉर्ड और फसल संबंधी जानकारी का मिलान करने में सहायता मिलने की उम्मीद है। सही रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर खरीद प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम करने में भी मदद मिल सकती है।
हरियाणा सरकार का ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पहले से ही किसानों के पंजीकरण, भूमि और फसल संबंधी विवरण तथा सरकारी कृषि सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
एग्रीस्टैक आईडी क्यों है जरूरी ?
एग्रीस्टैक केंद्र सरकार की डिजिटल कृषि पहल है। इसके तहत किसान की पहचान, भूमि रिकॉर्ड और कृषि संबंधी जानकारी को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। किसान आईडी से विभिन्न सरकारी योजनाओं में पात्रता और रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
हरियाणा सरकार के अनुसार, जून 2026 तक राज्य में 11.58 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण और 8.32 लाख किसान आईडी तैयार की जा चुकी थीं। इसके अलावा, 1.75 करोड़ कृषि भूखंडों की डिजिटल मैपिंग की गई थी और करीब 96 प्रतिशत गांवों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया था।
किसान आईडी का इस्तेमाल भविष्य में कृषि योजनाओं, फसल बीमा, सरकारी खरीद और अन्य किसान-केंद्रित सेवाओं में रिकॉर्ड सत्यापन को सुगम बनाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, किसी योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित योजना की अलग पात्रता शर्तें लागू रह सकती हैं।
मंडियों में फसल बेचने में होगी आसानी
फसल पंजीकरण का सही रिकॉर्ड होने से मंडी में किसान की उपज और पोर्टल पर दर्ज जानकारी का मिलान करना आसान हो सकता है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि खरीद प्रक्रिया में सही किसान और उसकी वास्तविक फसल का रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
एग्रीस्टैक आईडी से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी और पंजीकरण संबंधी संदेश भी भेजे जाएंगे। इससे किसानों को पंजीकरण और सत्यापन से जुड़े अपडेट प्राप्त करने में सुविधा हो सकती है।
किसानों को क्या करना चाहिए ?
किसानों को सलाह है कि वे अपनी एग्रीस्टैक आईडी, आधार से जुड़े मोबाइल नंबर और भूमि संबंधी रिकॉर्ड की जानकारी सही रखें। फसल पंजीकरण शुरू होने पर संबंधित सरकारी पोर्टल या कृषि विभाग की आधिकारिक सूचना के अनुसार प्रक्रिया पूरी करें। किसी भी निर्धारित अंतिम तारीख और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी पहले से जांच लेना बेहतर होगा।
कुल मिलाकर, हरियाणा में रबी सीजन के लिए डिजिटल फसल पंजीकरण और सत्यापन की व्यवस्था किसानों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पोर्टल समय पर उपलब्ध हो, किसानों को तकनीकी सहायता मिले और सत्यापन प्रक्रिया सरल तथा पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए।

