Yuva Haryana : हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 से 2014 के बीच संविदा आधार पर नियुक्त आईटीआई इंस्ट्रक्टर्स को बड़ी राहत देते हुए हरियाणा सरकार को उनकी नियमितीकरण (Regularisation) की मांग पर तीन माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि संबंधित अधिकारी याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर प्रदान कर कारणयुक्त आदेश पारित करें।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की खंडपीठ ने सरोज व अन्य द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
याचिका में कहा गया कि आईटीआई इंस्ट्रक्टर्स की नियुक्ति निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत स्वीकृत पदों पर की गई थी। सभी याचिकाकर्ता वर्ष 2011 से 2014 के बीच नियुक्त हुए और तब से बिना किसी सेवा अवरोध के कार्यरत हैं। उन्होंने निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं भी पूरी कर रखी हैं तथा 10 वर्ष से अधिक सेवा दे चुके हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण के साथ-साथ वेतन निर्धारण, वरिष्ठता, अन्य सेवा लाभ और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित बकाया लाभ देने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने मांग की कि अधिकारियों को उनके कानूनी नोटिस पर विचार करने का निर्देश दिया जाए। राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई।
इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन माह के भीतर सक्षम अधिकारी याचिकाकर्ताओं की मांग पर निर्णय लें। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय लेने से पहले याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता नियमितीकरण या अन्य लाभों के पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें बिना अनावश्यक देरी के लाभ प्रदान किए जाएं।
चयन प्रक्रिया पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इन नियुक्तियों के लिए राज्य सरकार ने समय-समय पर वर्ष 2010, 2011 और 2016 में चयन मानदंड निर्धारित और संशोधित किए थे। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए साक्षात्कार (इंटरव्यू) की व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई थी।
टीजीटी अंग्रेजी अभ्यर्थियों के मामले में भी निर्देश
इसी प्रकार हरियाणा में टीजीटी अंग्रेजी पद के चयनित अभ्यर्थियों की वरिष्ठता और सेवा लाभ से जुड़े मामले में भी हाईकोर्ट ने सरकार को तीन माह के भीतर लंबित मांगों पर कारणयुक्त आदेश जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता लाभ पाने के पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें संबंधित लाभ तत्काल प्रदान किए जाएं।

