Yuva Haryana: दिवाली से ठीक पहले हरियाणा सरकार ने गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पेराई सत्र शुरू होने से ठीक तीन दिन पहले अगले दो वर्षों के लिए गन्ने के भाव में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस नए फैसले के तहत साल 2026-27 के पेराई सत्र में किसानों को गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा, जबकि इसके अगले साल यानी 2027-28 में इसे बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि 2025-26 के पेराई सत्र में गन्ने का भाव 415 रुपये प्रति क्विंटल था। इस प्रकार पहले साल 15 रुपये और अगले साल 20 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। आगामी पेराई सत्र 1 नवंबर से शुरू होने जा रहा है।
खेती की बढ़ती लागत से राहत देने का प्रयास
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जानकारी दी कि गन्ने के दाम बढ़ाने का यह फैसला किसानों को खेती की बढ़ती लागत से राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। पिछले कुछ दिनों में किसान संगठनों के साथ हुई बैठकों के दौरान डीजल, खाद और मजदूरी की कीमतें बढ़ने से खेती का खर्च बढ़ने की चिंता सामने आई थी। सरकार का मानना है कि नए भाव से किसानों को इन खर्चों की भरपाई करने में काफी मदद मिलेगी।
पिछले वर्षों के मुकाबले गन्ने के भाव का सफर
हरियाणा में पिछले छह वर्षों के दौरान गन्ने के भाव में कुल 88 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगर पिछले सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2021-22 में गन्ने का भाव 362 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 2022-23 में बढ़कर 372 रुपये और 2023-24 में 386 रुपये प्रति क्विंटल हो गया था। इसके बाद साल 2024-25 में यह 400 रुपये, 2025-26 में 415 रुपये, और अब नए सत्र 2026-27 के लिए 430 रुपये तथा 2027-28 के लिए 450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
पंजाब और उत्तर प्रदेश से तुलना
पड़ोसी राज्यों की स्थिति देखें तो पंजाब में किसानों को कुल भाव 484.50 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जिसमें 416 रुपये प्रति क्विंटल राज्य निर्धारित मूल्य (एसएपी) और 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सीधे सब्सिडी शामिल है। इस तरह हरियाणा में वर्ष 2027-28 के लिए घोषित 450 रुपये का भाव भी पंजाब से 34.50 रुपये कम रहेगा। वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था, हालांकि नए सत्र के लिए वहां की दर अभी तय होना बाकी है।
किसान संगठनों की प्रतिक्रिया: “भाव कम से कम 550 रुपये होना चाहिए था”
सरकार के इस फैसले पर किसान संगठनों ने असंतोष जताया है। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान रतन मान ने कहा कि चीनी के दाम बाजार में 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं, लेकिन उस अनुपात में गन्ने का भाव नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने मांग की कि किसानों को वास्तविक लाभ देने के लिए गन्ने का मूल्य कम से कम 550 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए था। उनका तर्क है कि डीजल, खाद और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल की मामूली बढ़ोतरी से लागत की पूरी भरपाई होना मुमकिन नहीं है।
किसानों की आय में 11,300 रुपये तक की बढ़ोतरी का अनुमान
मुख्यमंत्री के अनुसार, गन्ने की औसत पैदावार 700 से 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती है। भाव में बढ़ोतरी होने से किसानों की आय प्रति एकड़, प्रति पेराई सत्र करीब 10,000 से 11,300 रुपये तक बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। सरकार का यह भी कहना है कि इससे किसानों के पास बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसे आएंगे, जिससे वे अपनी खेती में दोबारा निवेश कर सकेंगे। साथ ही, गन्ने का भाव पहले घोषित होने से किसानों को आगामी सीजन की योजना बनाने में आसानी होगी।
गन्ने के रकबे में 16 हजार हेक्टेयर की वृद्धि
हरियाणा में इस बार गन्ने की खेती का रकबा बढ़कर 1.10 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल 94 हजार हेक्टेयर में बिजाई हुई थी। हालांकि खरीफ 2026 में बिजाई का लक्ष्य 75 हजार हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन वास्तविक बिजाई 1.10 लाख हेक्टेयर यानी निर्धारित लक्ष्य का 146.67 प्रतिशत रही। वर्ष 2026-27 के पेराई सत्र में चीनी मिलों को करीब 320 लाख क्विंटल गन्ना मिलने की उम्मीद है, जिससे लगभग 32 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन होने का अनुमान जताया गया है।

