Yuva Haryana: प्रदेश में अब सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थाओं के लिए मनमाने तरीके से कंपनियों या सलाहकारों का चयन करना मुमकिन नहीं होगा. राज्य सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और नियमों को सख्त करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
मुख्य बिंदु:
मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य: अब किसी भी टेंडर में गुणवत्ता और खर्च के आधार पर कंपनी या सलाहकार का चयन करने से पहले ‘क्यूसीबीस’ (QCBS) प्रक्रिया अपनाने के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी लेनी होगी। इसके बिना टेंडर का नोटिस भी जारी नहीं किया जा सकेगा।
विशेष कार्यों तक सीमित: सरकार ने इस प्रक्रिया को केवल खास तकनीकी जानकारी या विशेषज्ञ सलाह की जरूरत वाले कार्यों तक ही सीमित कर दिया है।
गुणवत्ता और क्षमता की होगी परख: नई व्यवस्था के तहत, विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित काम के लिए केवल कम कीमत के बजाय गुणवत्ता और खर्च दोनों के आधार पर चयन करना क्यों जरूरी है। इसके बाद प्रशासनिक विभाग के माध्यम से प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा जाएगा और मंजूरी मिलने के बाद ही टेंडर जारी होगा।
कॉलेजों, एनसीसी और पुस्तकालयों को भी निर्देश: उच्च शिक्षा विभाग के महानिदेशालय ने सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों, एनसीसी इकाइयों के कमांडिंग अधिकारियों और जिला एवं उपमंडल पुस्तकालयों के लाइब्रेरियन को भी आदेश भेजकर इन नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और चयन प्रक्रिया का इस्तेमाल जरूरत होने पर ही सुनिश्चित करना है।

