Yuva Haryana: राज्य में पर्यावरण संरक्षण और तेजी से घटते हरित क्षेत्र को बचाने के लिए हरियाणा सरकार एक सख्त नया कानून लेकर आ रही है। इस नए कानून के तहत अब कोई भी व्यक्ति अपने घर, प्लॉट या निजी जमीन पर खड़े पेड़ों को भी बिना प्रशासनिक अनुमति के नहीं काट सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या 3 महीने तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश के गैर-वन क्षेत्रों और निजी जमीनों पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए सरकार ‘हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम’ का मसौदा तैयार कर रही है। अब तक इस विषय पर कोई पुख्ता और कड़ा कानून नहीं था। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने पेड़ों की कटाई से जुड़े एक मामले में हलफनामा दायर कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को इसकी जानकारी दी है। सरकार ने एनजीटी को बताया है कि ‘हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम’ का मसौदा तैयार हो चुका है, जिसे वन मंत्री की अध्यक्षता में संशोधनों के बाद कानूनी जांच के लिए भेजा जा रहा है। इसके बाद इसे आम जनता के सुझावों के लिए रखा जाएगा और अंत में विधानसभा से पारित कराकर लागू किया जाएगा।
गौरतलब है कि एनजीटी ने एक मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (PLPA), 1900’ की धारा-4 के दायरे में न आने वाली निजी भूमि पर पेड़ों की कटाई को विनियमित करने के लिए राज्य में कोई ठोस कानून मौजूद नहीं है।
नए कानून के मुख्य प्रावधान
दायरा: 30 सेंटीमीटर या उससे अधिक मोटाई वाली शाखाओं को काटना या छांटना भी अब पेड़ काटने की श्रेणी में ही आएगा।
पेड़ को नुकसान पहुंचाना अपराध: किसी भी पेड़ को कंक्रीट से ढंकना, उसमें रसायन (केमिकल) डालना या जलाना, जिससे वह सूख जाए, कानूनी अपराध माना जाएगा।
ऑनलाइन अनुमति प्रक्रिया: पेड़ काटने की अनुमति के लिए हरियाणा ई-सेवा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिस पर ट्री ऑफिसर 30 दिन के भीतर अपना निर्णय लेंगे।
किसानों को विशेष छूट: निजी कृषि खेतों में पेड़ों की सामान्य छंटाई करने या पूरी तरह सूख चुके मृत पेड़ों को हटाने के लिए किसी भी तरह की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

