हरियाणा का कॉटन हब बना सिरसा, 3.61 लाख एकड़ में नरमा की खेती, उत्पादन 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक
Yuva Haryana: हरियाणा का सिरसा जिला एक बार फिर राज्य की कपास (नरमा) खेती का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। इस वर्ष जिले में लगभग 3.61 लाख एकड़ क्षेत्र में कपास की बुवाई की गई है और उत्पादन 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहने का अनुमान है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर मौसम, उन्नत बीजों और किसानों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सिरसा लंबे समय से हरियाणा के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों में शामिल रहा है। राज्य के कुल कपास क्षेत्र और उत्पादन में जिले की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जाती है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में नरमा की फसल किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बनी हुई है।
हरियाणा की ‘व्हाइट गोल्ड’ बेल्ट का केंद्र
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में हिसार में आयोजित कृषि मेले के दौरान कपास को हरियाणा का “व्हाइट गोल्ड” (सफेद सोना) बताया था। उन्होंने कहा कि सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और आसपास के क्षेत्रों के लाखों किसानों की आजीविका कपास पर निर्भर है।
विशेषज्ञों के अनुसार सिरसा जिले की जलवायु और मिट्टी कपास उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है, जिसके कारण यह क्षेत्र राज्य की कॉटन बेल्ट का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादकता
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते मौसम और कीट प्रबंधन की चुनौतियों के बावजूद किसान नई तकनीकों और उन्नत किस्मों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने में सफल हो रहे हैं। हरियाणा सरकार भी कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक मशीनों, सूक्ष्म सिंचाई और वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है।
चुनौतियां भी बरकरार
हालांकि, कपास उत्पादक क्षेत्रों को सफेद मक्खी, गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म), जलभराव और मौसम संबंधी जोखिमों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पिछले वर्षों में इन कारणों से किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ा था। कृषि विशेषज्ञ लगातार बेहतर बीज, कीट प्रबंधन और जल संरक्षण तकनीकों पर जोर दे रहे हैं।
कपास उत्पादन से उद्योग को मिलेगा लाभ
कपास उत्पादन बढ़ने से प्रदेश के वस्त्र उद्योग और जिनिंग इकाइयों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने भी हाल ही में कपास उत्पादकता बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष मिशन शुरू किया है, जिससे किसानों और उद्योग दोनों को फायदा मिलने की संभावना है।

