Yuva Haryana: प्रदेश में डॉक्टरों की कमी के साथ-साथ सीएमओ (सिविल सर्जन) और पीएमओ (प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर) के पदों पर भी भारी किल्लत बनी हुई है। इन दोनों पदों पर सीधी भर्ती नहीं की जाती है, बल्कि डिप्टी सिविल सर्जन या सीनियर मेडिकल ऑफिसर को ही पदोन्नत किया जाता है। लेकिन पिछले 2 साल से प्रदेश में सीएमओ व पीएमओ के प्रमोशन रुके हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
12 जिलों में सिविल सर्जन की स्थायी नियुक्ति नहीं
प्रदेश के कुल 23 जिलों में से 12 जिलों में सिविल सर्जन की स्थायी नियुक्ति नहीं है। इनमें अंबाला, यमुनानगर, करनाल, कैथल, सोनीपत, फरीदाबाद, सिरसा, फतेहाबाद, हांसी, चरखी दादरी, झज्जर और रोहतक जिले शामिल हैं। इसके अलावा जींद, कैथल, हिसार, भिवानी, फरीदाबाद और सोनीपत समेत 200 बेड के कई अस्पतालों में पीएमओ के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। सिविल सर्जन और पीएमओ के पद न होने के कारण दूसरे डॉक्टरों को इन पदों का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
आखिरी बार नवंबर 2024 में हुई थी पदोन्नति
इससे पहले नवंबर 2024 में सरकार ने सीएमओ व पीएमओ के पद पर डिप्टी सिविल सर्जन और सीनियर मेडिकल ऑफिसर को पदोन्नति दी थी। अब लंबे समय से प्रमोशन न होने के कारण प्रदेश में सीएमओ, पीएमओ और सीनियर स्केल डिप्टी डायरेक्टर सहित कुल स्वीकृत 50 पदों में से 28 पद खाली पड़े हैं। जिन डिप्टी सिविल सर्जन व सीनियर मेडिकल ऑफिसर की पदोन्नति होनी थी, वे लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे हैं।
सरकार को भेजी गई है फाइल, जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सर्जन व पीएमओ के पद पर पदोन्नति की फाइल तैयार कर करीब 3 महीने पहले सरकार को भेज दी थी, लेकिन इसके बाद से फाइल पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में हरियाणा के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल का कहना है कि प्रमोशन में देरी का मुख्य कारण विजिलेंस क्लीयरेंस पेंडिंग होना है, और उम्मीद है कि जल्द ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा।

