Yuva Haryana: हरियाणा में मुस्लिम नाम वाले हिंदू बाहुल्य गांवों और आपत्तिजनक नाम वाली पंचायतों के नाम बदलने का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य सरकार द्वारा अब तक प्रदेश के 27 गांवों के नाम बदले जा चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में जहां 18 गांवों के नाम बदले गए थे, वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के दो वर्षों के दौरान 9 गांवों के नाम बदले गए हैं।
नाम बदलने की शुरुआत: पीएम मोदी को लिखी गई थी चिट्ठी
गांवों के विचित्र और शर्मनाक नामों को बदलने की यह मुहिम वर्ष 2015 में शुरू हुई थी। फतेहाबाद जिले के ‘गंदा’ गांव की छात्रा हरप्रीत कौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि उन्हें अपने गांव का नाम बताने में काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर इस गांव का नाम बदलकर ‘अजीत नगर’ रखा गया।
इसके बाद से ही प्रदेश भर में ऐसे गांवों के नाम बदलने की मांग उठने लगी, जिससे ग्रामीणों को वर्षों से चले आ रहे शर्मनाक व विचित्र नामों से मुक्ति मिल सकी।
किस जिले में कितने गांवों के बदले नाम?
पिछले 11 वर्षों में हरियाणा के 13 जिलों में 27 गांवों के नाम बदले गए हैं:
यमुनानगर: सबसे ज्यादा 5 गांवों के नाम बदले गए (जैसे बिलासपुर का व्यासपुर, अलीपुरा का आर्यपुरम, खिजराबाद का सरस्वती नगर, मुस्तफाबाद का सरस्वती नगर और अलीनगर का नाम बदलना)।
हिसार: 4 गांवों के नाम बदले गए (जैसे किन्नर का गैबी नगर, कुतिया खेड़ी का वीरपुर, ढाणी गारण का हसनगर)।
जींद: 3 गांवों के नाम बदले गए (जैसे पिंडारी का पांडु पिंडारा, टोडी खेड़ी का सरना खेड़ी, गंदा खेड़ा का गुरुकुल खेड़ा, चूहड़पुर का चांदपुर)।
झज्जर: नाम बदले गए (जैसे इस्लामागढ़ का छुछकवास, मोहम्मदपुर माजरा का बिरहड़ माजरा)।
गुरुग्राम, फतेहाबाद, सोनीपत और करनाल: इन जिलों में 2-2 गांवों के नाम बदले गए।
रोहतक, रेवाड़ी, भिवानी और कुरुक्षेत्र: इन जिलों में 1-1 गांव का नाम बदला गया है।
ग्रामीणों में खुशी की लहर
गांवों के नए नाम तय होने के बाद अब स्थानीय निवासी गर्व से अपने गांव की पहचान बताते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने नामों के कारण बच्चों, युवाओं और महिलाओं को दूसरे स्थानों पर अपने गांव का नाम बताने में संकोच होता था, लेकिन सरकार के इस फैसले से उन्हें एक नई और सम्मानजनक पहचान मिली है।

