Yuva Haryana: हरियाणा में अल्पसंख्यकों के हितों की निगरानी और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए राज्य अल्पसंख्यक आयोग के गठन का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल ने हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम को मंजूरी दे दी है। आयोग को सिविल कोर्ट जैसी कुछ शक्तियां प्रदान की जाएंगी।
तीन साल का होगा कार्यकाल
आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन सदस्यों का प्रावधान किया गया है। इनका कार्यकाल तीन साल का होगा। सरकार द्वारा विधिवत अधिसूचना जारी होने के बाद आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति सरकार करेगी। पद रिक्त होने पर सरकार नए व्यक्ति की नियुक्ति कर सकेगी।
शिकायतों की जांच और रिकॉर्ड तलब करने का अधिकार
आयोग को अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में शिकायतों की जांच करने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा आयोग संबंधित व्यक्ति को बुलाकर पूछताछ कर सकेगा और दस्तावेज व रिकॉर्ड तलब कर सकेगा।
सरकारी एजेंसियों की मदद से किसी मामले की जांच भी कराई जा सकेगी। हालांकि, किसी व्यक्ति को दीवानी या आपराधिक मामले में सीधे दोषी ठहराने का अधिकार आयोग के पास नहीं होगा।
शिक्षा, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा पर फोकस
आयोग अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक हितों से जुड़े मामलों की निगरानी करेगा। शिक्षा, रोजगार, सामाजिक विकास और आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनके हितों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
हरियाणा में कमान के लिए आयोग के सचिव की नियुक्ति भी सरकार द्वारा की जाएगी। सचिव आयोग के कामकाज में सहयोग करेंगे।
पंजाब चुनाव के बीच सिख चेहरों की चर्चा
राज्य में आयोग के गठन को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज है। पंजाब चुनाव को देखते हुए सिख चेहरे को आयोग में जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चाएं सामने आई हैं। माना जा रहा है कि आयोग में नियुक्तियों के दौरान सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
सरकार को दे सकेगा सिफारिशें
आयोग समय-समय पर सरकार को अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों पर सिफारिशें भेज सकेगा। सरकार को इन सिफारिशों पर विचार करना होगा और विधानसभा के सामने भी इन्हें रखा जा सकेगा।

