Yuva Haryana : बिहार से शुरू हुई वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की कवायद अब देश के अन्य 12 राज्यों में भी कराने का ऐलान चुनाव आयोग द्वारा हो चुका है।
देश के ऐसे राज्यों में जहां आने वाले साल में चुनाव है, वहां एसआईआर का पूरा विरोध हो रहा है। सबसे ज्यादा विरोध पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में हो रहा है। इन तीनों ही राज्यों में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों की सरकार है।
इस बीच, हरियाणा में सिरसा से कांग्रेस की सांसद कुमारी सैलजा ने भी एसआईआर की टाइमिंग पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि एसआईआर की टाइमिंग पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। जब भी चुनाव आते है, अचानक फैसले और घोषणाएं होना चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते है।
उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र की नींव को मजबूत रखने के लिए चुनाव आयोग पर पक्षपात का धब्बा नहीं लगना चाहिए। वहीं चुनाव आयोग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि देश में फ्री और फेयर इलेक्शन सुनिश्चित हो। यदि एक भी नागरिक यह महसूस करता है कि निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न है, तो आयोग का दायित्व बनता है कि वह स्पष्ट रूप से जनता के सामने आए और पारदर्शिता स्थापित करे।
वहीं कुमारी सैलजा ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रोजगार के अवसर न मिलने के कारण हमारे कई युवा गलत रास्तों पर धकेले जा रहे हैं। काम न मिलने पर कुछ युवा मजबूरी में विदेश जाते हैं और वहां एजेंसियों की धोखाधड़ी का शिकार होकर अपराधी की तरह व्यवहार झेलते हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को इस स्थिति की जवाबदेही लेनी होगी कि क्यों नौजवानों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है?
कुमारी सैलजा ने हरियाणा में भाजपा सरकार के एक साल के कार्यकाल को शासन का नहीं, कुशासन का प्रतीक बताया और कहा कि हरियाणा में भाजपा सरकार के 11 साल बाद भी कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। नशे का जाल गांव-गांव, घर-घर तक पहुंच चुका है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार तब हरकत में आती है जब हादसे हो जाते हैं। जनता की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं, जमीनी हालात बद से बदतर हो चुके हैं। यह स्थिति भाजपा सरकार की नाकामी और प्रशासनिक निकम्मेपन का साफ प्रमाण है।



