हरियाणा की 4 सरकारी बिजली कंपनियां शेयर बाजार में उतरने की तैयारी में, केंद्र ने प्रक्रिया तेज करने को कहा
Yuva Haryana: हरियाणा की चार सरकारी बिजली कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस संबंध में राज्य सरकार से लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने और आगे की कार्रवाई का विस्तृत रोडमैप तैयार करने को कहा है। केंद्रीय विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने 19 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को पत्र लिखकर इस दिशा में जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया।
शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रस्तावित योजना में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVNL), दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (DHBVNL), हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) और हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (HVPNL) शामिल हैं। हालांकि, अभी इन कंपनियों की लिस्टिंग पूरी नहीं हुई है। इसके लिए कई प्रक्रियागत मुद्दों का समाधान करना बाकी है।
केंद्र सरकार को क्यों उठाना पड़ा कदम ?
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय का मानना है कि सरकारी बिजली कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने से उनके लिए पूंजी जुटाने के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण, बुनियादी ढांचे में निवेश और कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों को वित्तीय जानकारी और कामकाज से जुड़े नियमों का अधिक व्यवस्थित तरीके से पालन करना पड़ता है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है। केंद्र को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से बिजली कंपनियों के संचालन में सुधार होगा और राज्य सरकार के बजट पर उनकी निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।
मंत्रालय ने अपने पत्र में पहले जारी निर्देशों और ऊर्जा क्षेत्र में राज्यों के साथ हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया है। अब राज्य सरकार से संबंधित विभागों और बिजली निगमों के बीच समन्वय बढ़ाकर लंबित काम समयबद्ध तरीके से पूरा कराने को कहा गया है।
लिस्टिंग की राह में दो बड़ी अड़चनें
प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दो प्रमुख मुद्दों का समाधान जरूरी है। पहला, कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग बिजली वितरण कंपनी यानी एग्री डिस्कॉम को पूरी तरह परिचालन में लाना है। दूसरा, हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन और हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम की लिस्टिंग से जुड़ी तैयारियों के लिए सलाहकार यानी कंसल्टेंट की नियुक्ति अभी लंबित है।
इन मुद्दों पर निर्णय और जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद ही लिस्टिंग की दिशा में आगे की कार्रवाई को गति मिल सकेगी। इसलिए केंद्र ने राज्य सरकार से लंबित कार्यों की स्पष्ट समयसीमा और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया है।
बिजली कर्मचारियों ने जताया विरोध
दूसरी ओर, सरकारी बिजली कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की पहल को लेकर बिजली कर्मचारी संगठनों में चिंता है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यह कदम आगे चलकर बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में बढ़ सकता है। उन्हें कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था पर संभावित असर की आशंका है।
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घनघस के अनुसार, कर्मचारी संगठन इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 नवंबर को ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ प्रस्तावित बैठक में भी यह मुद्दा उठाया जा सकता है।
हालांकि, शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अपने आप में कंपनी के निजीकरण के बराबर नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव कंपनी की हिस्सेदारी के ढांचे, सरकार के पास रहने वाले शेयरों और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस योजना को लेकर कर्मचारियों की आशंकाएं और केंद्र सरकार के बताए संभावित फायदे चर्चा के प्रमुख विषय हैं।
अब आगे क्या होगा?
अब हरियाणा सरकार और संबंधित बिजली निगमों को लंबित मुद्दों पर निर्णय लेकर आगे की प्रक्रिया का रोडमैप तैयार करना होगा। इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कंपनियों की लिस्टिंग किस चरण में और किस समयसीमा के भीतर आगे बढ़ेगी।
फिलहाल यह प्रस्ताव हरियाणा के बिजली क्षेत्र में वित्तीय सुधार, निवेश और पारदर्शिता से जुड़ी एक अहम पहल है। लेकिन इसे लागू करने से पहले प्रक्रियागत अड़चनों को दूर करना और कर्मचारियों की चिंताओं पर चर्चा करना भी महत्वपूर्ण होगा।

