Yuva Haryana : गुरुग्राम में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 20 एकड़ जमीन पर कृत्रिम झील विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस संबंध में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं गुरुग्राम के भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक पत्र लिखा है।
राव इंद्रजीत ने मांग उठाई है कि सरहौल बॉर्डर के पास हरियाणा पर्यटन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर कृत्रिम झील विकसित की जाए ताकि इसकी मदद से बारिश के पानी को जमा करने के साथ-साथ भूजल स्तर को रिचार्ज किया जा सके।
राव इंद्रजीत सिंह ने पत्र में कहा है कि मानसून के दौरान गुरुग्राम में होने वाले जलभराव से जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित रहता है। इस विषय पर उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और समस्या के स्थायी समाधान पर चर्चा की। बैठक में शहर के जल निकासी तंत्र, प्राकृतिक नालों और बारिश के पानी के बहाव से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया गया।

आपको बता दें कि गुरुग्राम में जलभराव की समस्या का समाधान तलाशने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियां भी काम कर रही हैं। नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने IIT गांधीनगर के विशेषज्ञों को नियुक्त किया है, जबकि गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने जापानी कंपनी Nippon Koei को इस काम में लगाया है। दोनों एजेंसियां भविष्य में जलभराव की स्थिति को रोकने के लिए योजना तैयार कर रही हैं।
मंत्री राव इंद्रजीत ने बताया कि सरहौल बॉर्डर के पास पर्यटन विभाग की करीब 20 एकड़ जमीन लंबे समय से खाली पड़ी है। राव इंद्रजीत सिंह ने सुझाव दिया कि इस जमीन को कृत्रिम झील के रूप में विकसित कर बारिश के पानी को एकत्र किया जा सकता है। इससे जलभराव कम करने के साथ भूजल रिचार्ज में भी मदद मिल सकती है।
वहीं अधिकारियों के मुताबिक पर्यटन विभाग की जमीन के एक हिस्से को कुछ वर्षों के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के निर्माण के लिए लीज पर दिया गया है। सांसद ने सुझाव दिया कि विभाग के पास दिल्ली-जयपुर हाईवे के दोनों तरफ एंबियंस मॉल की ओर भी जमीन उपलब्ध है। इन क्षेत्रों में भी बारिश के पानी के संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई है।
सैटेलाइट सर्वे से प्राकृतिक नालों की पहचान
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि गुरुग्राम में कई प्राकृतिक नालों, झीलों और बारिश के पानी की निकासी के पुराने रास्तों पर अतिक्रमण हो चुका है। सांसद ने इन प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की पहचान के लिए सैटेलाइट सर्वे कराने और अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
निर्माण मलबे से भी बाधित हो रहा पानी का बहाव
विशेषज्ञों के अनुसार अतिक्रमण के अलावा बिल्डरों और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाला मलबा भी कई स्थानों पर जल निकासी मार्गों को बाधित कर रहा है। इससे बारिश का पानी अपने प्राकृतिक रास्ते से आगे नहीं बढ़ पाता और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
जलभराव रोकने के साथ भूजल रिचार्ज पर जोर
कृत्रिम झील, प्राकृतिक नालों की पहचान और अतिक्रमण हटाने की योजना का उद्देश्य केवल मानसून के दौरान जलभराव को कम करना नहीं है, बल्कि बारिश के पानी का बेहतर प्रबंधन और भूजल स्तर में सुधार करना भी है। गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में बारिश के पानी को रोककर उसका इस्तेमाल भूजल रिचार्ज के लिए करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

