Yuva Haryana: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (High Court) ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान (PGIMS), रोहतक के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को तीन साल के अतिरिक्त कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त (Re-employ) करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने 65 वर्ष की निर्धारित आयु सीमा से अधिक सेवा विस्तार देने के कानूनी आधार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
65 वर्ष से कम आयु वाले अधिकारी को सौंपें प्रभार
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर इस पुनर्नियुक्ति की परिस्थितियों और कानूनी औचित्य को स्पष्ट करें।
इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि संस्थान का प्रशासनिक काम प्रभावित न हो, इसके लिए तुरंत प्रभाव से 65 वर्ष से कम आयु के किसी उपयुक्त व्यक्ति को निदेशक का प्रभार सौंपा जाए।
क्या है पूरा मामला?
31 जुलाई 2026 को पूरी हो चुकी है आयु सीमा: याचिकाकर्ता डॉ. अनिल पन्निकर ने अदालत में तर्क दिया कि डॉ. सिंघल 31 जुलाई 2026 को 65 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं। विश्वविद्यालय विधान (Statutes) की धारा 3(1)(e) के अनुसार, 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर अधिकारी को पद छोड़ना अनिवार्य है।
अगस्त में दिया गया था विस्तार: राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने 13 अगस्त को विश्वविद्यालय विधान की धारा 3(1)(e) के तहत आयु सीमा में छूट देते हुए डॉ. सिंघल को तीन साल के लिए पुनः निदेशक नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को गैर-कानूनी और मनमाना बताते हुए चुनौती दी है।
दिसंबर 2024 से संभाल रहे थे कार्यभार: याचिका के अनुसार, डॉ. सिंघल को नवंबर/दिसंबर 2024 में नियमित नियुक्ति होने तक कार्यवाहक प्रभार दिया गया था। संस्थान ने विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू भी की थी, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया (Prima facie), प्रशासन किसी प्रशासनिक आदेश के जरिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया और नियमों से अलग नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि कोई भी पदभार ग्रहण (Joining) उस नियुक्ति को वैध नहीं ठहरा सकता जिसे कानून की धाराएं अनुमति नहीं देतीं।
अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव से यह भी बताने को कहा है कि क्या नियमों में आयु सीमा की छूट देने का कोई विशेष प्रावधान है और क्या इसके लिए राज्य सरकार की ओर से कोई सिफारिश की गई थी।
अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।

