Yuva Haryana: भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ महिला नेत्री और पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वह हरियाणा से संबंध रखने वाली दूसरी महिला नेत्री बन गई हैं, जो राज्यपाल के पद तक पहुंची हैं। इससे पहले चंद्रावती हरियाणा से जुड़ी ऐसी पहली महिला नेत्री थीं, जिन्होंने पुडुचेरी की उपराज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।
डॉ. सुधा यादव का राजनीतिक सफर संघर्ष, संगठनात्मक कार्य और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी से जुड़ा रहा है। वह भाजपा की वरिष्ठ नेताओं में गिनी जाती हैं और वर्तमान में पार्टी के संसदीय बोर्ड की सदस्य भी हैं। उनकी राज्यपाल पद पर नियुक्ति को हरियाणा की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं डॉ. सुधा यादव ?
डॉ. सुधा यादव का जन्म 16 अक्टूबर 1965 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के मोतला कलां गांव में हुआ था। उन्होंने आईआईटी रुड़की से रसायन विज्ञान में एम.एससी. और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही थीं।
उनके जीवन में बड़ा बदलाव वर्ष 1999 में आया। उस समय उनके पति बीएसएफ में तैनात थे और कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गए। इस घटना के बाद सुधा यादव ने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और राजनीति के माध्यम से समाज सेवा का रास्ता चुना।
1999 में भाजपा के टिकट पर जीता लोकसभा चुनाव
वर्ष 1999 में भाजपा ने सुधा यादव को हरियाणा की महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राव इंद्रजीत सिंह को हराकर जीत दर्ज की और संसद पहुंचीं। उस समय यह जीत राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी गई।
वर्ष 1999 से 2004 तक वह लोकसभा सांसद रहीं। इसके बाद भी पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही। वर्ष 2019 से 2022 तक उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य के रूप में काम किया। वर्ष 2022 में उन्हें भाजपा के संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया। यह पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्थाओं में से एक है।
हरियाणा की राजनीति में महिलाओं की उपलब्धियां
हरियाणा की राजनीति में महिलाओं ने अलग-अलग समय पर महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। सुधा यादव के अलावा चंद्रावती, सुषमा स्वराज, रेखा गुप्ता और डॉ. कमला वर्मा जैसी महिला नेताओं का भी राज्य से संबंध रहा है।
चंद्रावती वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर भिवानी लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। उन्होंने हरियाणा की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में पुडुचेरी की उपराज्यपाल बनीं। वह 18 सितंबर 1990 तक इस पद पर रहीं। उनका कार्यकाल लगभग 10 महीने यानी 302 दिनों का था। इससे पहले वह हरियाणा की पहली महिला विधायक और राज्य की राजनीति में प्रमुख चेहरा रही थीं।
डॉ. कमला वर्मा ने वर्ष 1980 से 1983 तक हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वहीं, रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं। सुषमा स्वराज भी दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी थीं। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि हरियाणा से जुड़ी महिला नेताओं ने राज्य के बाहर भी महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाई हैं।
हरियाणा की राजनीति में सुधा यादव का योगदान
डॉ. सुधा यादव का राजनीतिक सफर केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। सांसद के रूप में कार्य करने के बाद उन्होंने भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में उनकी भूमिका और पार्टी के संसदीय बोर्ड में स्थान ने उनकी राजनीतिक पहचान को और मजबूत किया।
कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति से उन्हें एक नई संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है। यह नियुक्ति हरियाणा से जुड़ी उन महिला नेताओं की परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिन्होंने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किए हैं।
डॉ. सुधा यादव का सफर व्यक्तिगत कठिनाइयों से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने का उदाहरण है। उनकी नई जिम्मेदारी से हरियाणा के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हुई है

