Yuva Haryana : हरियाणा के रोहतक की प्रतिभाशाली निशानेबाज आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स 2026 में महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता की कहानी केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और खेल के बीच संतुलन बनाकर लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणादायक मिसाल भी है।
98.6% अंक लाकर जीता मां का भरोसा
आशिमा की मां सुमित्रा अहलावत, जो रोहतक के सीआर कॉलेज ऑफ लॉ में प्रोफेसर हैं, बताती हैं कि आशिमा शुरू से ही पढ़ाई में बेहद होनहार थीं। जब उन्होंने शूटिंग को करियर बनाने की इच्छा जताई तो परिवार को पढ़ाई पर असर पड़ने की चिंता थी।
मां ने शर्त रखी कि यदि आशीमा 12वीं कक्षा में 96 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करेंगी, तभी उन्हें शूटिंग में आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। आशिमा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 12वीं में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल कर दिखाए।
कोविड काल में शुरू हुआ शूटिंग का सफर
कोविड-19 महामारी के दौरान भी आशिमा ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उन्होंने प्रशिक्षण विकल्पों की तलाश की और फरीदाबाद स्थित मानव रचना विश्वविद्यालय से शूटिंग की शुरुआत की। बाद में उन्होंने दिल्ली की कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में अभ्यास किया।
शुरुआती दिनों में वह रोहतक से फरीदाबाद तक रोजाना कई घंटे सफर करती थीं, लेकिन कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा।
राज्य स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
आशिमा ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं, विश्वविद्यालय खेलों, खेलो इंडिया और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन किया। इन्हीं उपलब्धियों के दम पर उन्हें भारतीय महिला शूटिंग टीम में जगह मिली और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
बचपन में पिता का साया खोया
आशिमा का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जब वह मात्र छह वर्ष की थीं, तब उनके पिता का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। उनकी मां ने अकेले ही आशिमा और उनकी छोटी बहन की परवरिश की और उनकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में हर संभव सहयोग दिया।
अब ओलंपिक पदक है अगला लक्ष्य
एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने के बाद आशिमा की नजर अब ओलंपिक पदक पर है। परिवार को उम्मीद है कि वह आने वाले वर्षों में भारत के लिए ओलंपिक में भी पदक जीतकर नया इतिहास रचेंगी।
शिक्षा और खेल दोनों में उत्कृष्टता
आशिमा ने अपनी पढ़ाई भी उत्कृष्ट स्तर पर जारी रखी। उन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और वर्तमान में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। उनकी उपलब्धियां युवाओं के लिए यह संदेश देती हैं कि मेहनत और समर्पण से शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में सफलता हासिल की जा सकती।

