Yuva Haryana: धान और बाजरे की सरकारी खरीद में देरी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत मिलने के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। हरियाणा के पूर्व मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के नेता संपत सिंह ने खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में देरी, बारिश से फसलों को हुए नुकसान और मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
छह महीने से खरीद का इंतजार कर रहे किसान
संपत सिंह ने कहा कि पिछले छह महीनों से किसान अपनी फसलों की खरीद और भुगतान को लेकर परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद व्यवस्था में देरी के कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की खरीद नीतियों और मंडियों में पर्याप्त सुविधाओं के अभाव ने किसानों की समस्याओं को और बढ़ा दिया है। बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान के बीच खरीद प्रक्रिया धीमी रहने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
धान खरीद के आंकड़ों पर उठाए सवाल
संपत सिंह के अनुसार, सरकारी आंकड़ों में धान खरीद की स्थिति बेहतर दिखाई जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले तक लगभग 21 लाख टन धान की खरीद हुई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में करीब 35.38 लाख टन धान खरीदा जा चुका था।
उन्होंने सवाल उठाया कि खरीद की धीमी गति के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, खरीद प्रक्रिया में देरी और भुगतान संबंधी समस्याएं किसानों की परेशानी बढ़ा रही हैं।
बाजरा किसानों को MSP से कम दाम मिलने का आरोप
संपत सिंह ने बाजरा खरीद की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,900 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था, लेकिन किसानों को कई जगह इससे काफी कम कीमत मिल रही है।
उन्होंने दावा किया कि कुछ किसानों को 1,900 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बाजरा बेचना पड़ रहा है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल सैकड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, यदि किसानों को घोषित MSP नहीं मिलता, तो सरकारी समर्थन मूल्य का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।
बारिश से नुकसान और बढ़ी किसानों की परेशानी
पूर्व मंत्री ने कहा कि बारिश से फसलों को हुए नुकसान ने किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर किया है। एक ओर फसल खराब होने का खतरा है, वहीं दूसरी ओर मंडियों में खरीद और भुगतान की प्रक्रिया में देरी से किसानों को आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था की जाए, फसल खरीद में तेजी लाई जाए और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
सरकार से खरीद व्यवस्था सुधारने की मांग
संपत सिंह ने सरकार से धान और बाजरे की खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और MSP से कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी खत्म होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि बारिश से प्रभावित किसानों के नुकसान का आकलन कर उचित सहायता दी जाए। साथ ही, मंडियों में खरीद और भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए परेशान न होना पड़े।
उनके अनुसार, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि सरकारी खरीद व्यवस्था समयबद्ध हो और किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले।

