Yuva Haryana: हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने गुरुग्राम में लगातार गिरते भूजल स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि शहर में भूजल की स्थिति बेहद चिंताजनक है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को स्थिति का विस्तृत अध्ययन कर सुधारात्मक उपाय सुझाने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
भूजल स्तर लगातार गिर रहा
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि गुरुग्राम के कई इलाकों में भूजल स्तर जमीन की सतह से लगभग 40 मीटर या उससे भी अधिक नीचे पहुंच चुका है। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण और अन्य एजेंसियों की रिपोर्टों में भी भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। कुछ क्षेत्रों में जलस्तर 50 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच गया है।
हाईकोर्ट ने जताई भविष्य की चिंता
मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी प्राकृतिक संसाधनों की केवल संरक्षक है। यदि भूजल जैसे संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। अदालत ने कहा कि भूजल का अंधाधुंध दोहन दशकों से जारी है, जिसके कारण स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
जलभराव और जल संकट का विरोधाभास
अदालत ने यह भी कहा कि गुरुग्राम में हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या देखने को मिलती है, लेकिन वर्षा जल का प्रभावी उपयोग भूजल रिचार्ज के लिए नहीं किया जा रहा। प्राकृतिक जल निकायों के खत्म होने और उनके जलमार्गों के अवरुद्ध होने से भी स्थिति और गंभीर हुई है।
अधिकारियों को दिए निर्देश
हाईकोर्ट ने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और अन्य संबंधित विभागों को सभी हितधारकों की बैठक बुलाने तथा भूजल संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और अवैध बोरवेलों पर नियंत्रण जैसे उपायों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
अदालत ने मांगी रिपोर्ट
अदालत ने अधिकारियों से भूजल संकट से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही यह भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि जिन क्षेत्रों में वैकल्पिक जल आपूर्ति उपलब्ध है, वहां भूजल दोहन को सीमित या बंद किया जा सकता है या नहीं।

