सोनीपत की काजल ढोचक ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जीता सिल्वर, 18 साल की उम्र में रचा इतिहास
Yuva Haryana: हरियाणा की बेटी काजल ढोचक ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया है। सोनीपत जिले के लाठ गांव की रहने वाली 18 वर्षीय काजल ने कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। महिला 76 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में उनका मुकाबला यूक्रेन की पहलवान अनास्तासिया अल्पयेयेवा से हुआ। काजल ने आखिरी क्षणों तक मुकाबला किया, लेकिन उन्हें 6-8 से हार का सामना करना पड़ा और रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
काजल का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने पहली बार सीनियर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए पदक अपने नाम किया। जूनियर स्तर पर पहले ही अपनी प्रतिभा साबित कर चुकीं काजल ने सीनियर वर्ग में भी दुनिया की दिग्गज पहलवानों को कड़ी चुनौती दी।
फाइनल में आखिरी समय तक दिया कड़ा मुकाबला
76 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में काजल के सामने यूक्रेन की अनुभवी पहलवान अनास्तासिया अल्पयेयेवा थीं। मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों पहलवानों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। काजल ने वापसी करते हुए स्कोर 4-4 से बराबर कर दिया था, लेकिन मुकाबला समाप्त होने से करीब 20 सेकंड पहले यूक्रेनी पहलवान ने अहम अंक हासिल कर बढ़त बना ली।
काजल ने अंतिम क्षणों में भी हार नहीं मानी और एक और अंक हासिल करने की कोशिश की। उन्होंने मुकाबले का स्कोर 6-8 तक पहुंचाया, लेकिन समय समाप्त होने के कारण वह स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं। इस तरह उन्हें रजत पदक मिला।
सेमीफाइनल में 1-7 से पिछड़ने के बाद की थी शानदार वापसी
फाइनल तक पहुंचने का काजल का सफर भी बेहद शानदार रहा। सेमीफाइनल में उनका सामना किर्गिस्तान की अनुभवी पहलवान ऐपेरी मेडेट काइजी से हुआ। मुकाबले के दौरान काजल एक समय 1-7 से पीछे चल रही थीं। ऐसी स्थिति में वापसी करना बेहद मुश्किल माना जा रहा था, लेकिन काजल ने हार नहीं मानी।
उन्होंने दूसरे पीरियड में आक्रामक खेल दिखाया और लगातार अंक हासिल करते हुए मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरकार काजल ने 10-7 से जीत दर्ज करके फाइनल में जगह बना ली। इस जीत ने उनके आत्मविश्वास और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता को साबित किया।
जूनियर स्तर पर भी कई बड़ी उपलब्धियां
काजल ढोचक पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने अंडर-17 और अंडर-20 विश्व कुश्ती प्रतियोगिताओं में खिताब जीतकर अपनी पहचान बनाई। जूनियर स्तर पर मिली सफलता के बाद सीनियर विश्व चैंपियनशिप में उनका पदक जीतना उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
काजल की सफलता के पीछे नियमित अभ्यास, अनुशासन और कोचों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। सोनीपत की खेल अकादमी में उन्होंने कठिन प्रशिक्षण के जरिए अपनी कुश्ती को मजबूत किया। अब सीनियर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद उनसे भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ गई है।
भारतीय महिला कुश्ती के लिए ऐतिहासिक दिन
इस विश्व चैंपियनशिप में भारत की काजल ढोचक और नीलम सिरोही ने एक ही दिन अपने-अपने भार वर्गों के फाइनल में पहुंचकर इतिहास बनाया। काजल ने 76 किलोग्राम वर्ग में और नीलम ने 50 किलोग्राम वर्ग में फाइनल खेला। दोनों भारतीय पहलवानों ने बाद में रजत पदक हासिल किए। यह भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
हरियाणा में कुश्ती की मजबूत परंपरा रही है और प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। काजल की उपलब्धि ने एक बार फिर दिखाया है कि प्रदेश की युवा महिला पहलवान भी विश्व स्तर पर देश को गौरवान्वित करने की क्षमता रखती हैं।
काजल भले ही इस बार स्वर्ण पदक से चूक गईं, लेकिन 18 वर्ष की उम्र में सीनियर विश्व चैंपियनशिप का रजत पदक जीतना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। अब उनकी नजर आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और भविष्य में विश्व चैंपियन बनने के लक्ष्य पर रहेगी।

