हरियाणा में मंडियों पर बड़ा एक्शन: 68,405 क्विंटल बाजरा कम मिला, 5 कर्मचारी सस्पेंड; बिना कागजात धान लाने वाले वाहन होंगे जब्त
Yuva Haryana: हरियाणा में सरकारी अनाज खरीद और भंडारण में अनियमितताओं के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चरखी दादरी की नई अनाज मंडी में रिकॉर्ड के मुकाबले 68,405 क्विंटल बाजरा कम मिलने के बाद मार्केट कमेटी के सचिव समेत पांच अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, करनाल जिले में उत्तर प्रदेश से कथित तौर पर अवैध रूप से लाए जा रहे धान की रोकथाम के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने वैध दस्तावेज नहीं होने पर संबंधित वाहनों को जब्त करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
चरखी दादरी मंडी में 68,405 क्विंटल बाजरा कम मिला
चरखी दादरी की नई अनाज मंडी में बाजरे के स्टॉक की जांच के दौरान बड़ी गड़बड़ी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार, मंडी में कुल 4,18,290 क्विंटल बाजरे की आवक दर्ज की गई थी। इसमें से 2,32,375 क्विंटल बाजरा गोदामों में भेजा जाना दर्ज था। इस हिसाब से मंडी में 1,85,915 क्विंटल बाजरा बचना चाहिए था।
लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर केवल 1,17,510 क्विंटल बाजरा मिला। इस तरह रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 68,405 क्विंटल का अंतर पाया गया। इतनी बड़ी मात्रा में बाजरा कम मिलने से खरीद और भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जांच रिपोर्ट में मामले को संदिग्ध बताते हुए संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है।
मार्केट कमेटी सचिव समेत पांच कर्मचारी सस्पेंड
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के मंडी दौरे के दौरान किसानों ने बाजरे के स्टॉक और खरीद रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग उठाई थी। इसके बाद उपायुक्त मनदीप कौर ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। कमेटी ने रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध बाजरे का मिलान किया।
जांच के बाद हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मार्केट कमेटी के सचिव-सह-कार्यकारी अधिकारी विद्या सागर, लेखाकार तेजवीर सिंह, मंडी सुपरवाइजर राकेश कुमार, मंडी सुपरवाइजर चतुर्भुज और नीलामी रिकॉर्डर सतीश कुमार को निलंबित कर दिया। सभी का मुख्यालय पंचकूला स्थित कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
अब खरीद एजेंसी और फर्म के हिसाब से स्टॉक का मिलान किया जा रहा है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और जिम्मेदारी के निर्धारण के आधार पर की जाएगी। निलंबन को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता; मामले की जांच जारी है।
करनाल में बाहरी धान की आवक पर सख्ती
दूसरी ओर, करनाल जिले की मंडियों में उत्तर प्रदेश से धान लाकर हरियाणा की सरकारी खरीद व्यवस्था में बेचने के कथित मामलों पर प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। हाल के दिनों में घरौंडा और इंद्री में धान की संदिग्ध आवक से जुड़े मामले सामने आए हैं और पुलिस ने एफआईआर दर्ज की हैं।
प्रशासन को आशंका है कि बाहरी राज्यों से लाए गए धान को हरियाणा के किसानों की फसल के रूप में दिखाने के लिए किसान पंजीकरण या ई-खरीद रिकॉर्ड का दुरुपयोग किया जा सकता है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही होगी।
उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने अधिकारियों को मंडियों के प्रवेश द्वारों और वाहनों की जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं। बिना वैध कागजात के धान लाने वाले वाहनों को जब्त करने और खरीद प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। निगरानी के लिए विशेष टीमें और उड़नदस्ते भी लगाए गए हैं।
आढ़तियों और किसानों को भी चेतावनी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई आढ़ती, किसान या अन्य व्यक्ति बाहरी धान की अवैध खरीद-बिक्री में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कराने और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी खरीद में केवल पात्र किसानों की फसल और सही दस्तावेजों के आधार पर ही प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।
हालांकि, कुरुक्षेत्र समेत कुछ मंडियों में किसानों और आढ़तियों ने गेटपास जारी होने में आ रही दिक्कतों की शिकायत भी की है। ऐसे में प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि अवैध आवक पर रोक लगाने के साथ स्थानीय किसानों की वैध फसल की खरीद प्रभावित न हो।
सरकार का लक्ष्य: खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता
मंडी में बाजरे की कमी और धान की संदिग्ध आवक के मामले हरियाणा की खाद्यान्न खरीद व्यवस्था में स्टॉक रिकॉर्ड, गेटपास और किसान पंजीकरण की जांच की अहमियत दिखाते हैं। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी खरीद में पारदर्शिता बनाए रखना और पात्र किसानों के हितों की रक्षा करना है।
आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट, खरीद रिकॉर्ड और पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

