Yuva Haryana: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किस्तों का भुगतान न करने के कारण रद्द किए गए प्लॉटों की बहाली के लिए एक स्पष्ट और महत्वपूर्ण भुगतान फार्मूला तय किया है। अदालत ने अपने फैसले में सख्त निर्देश दिए हैं कि अधिकारी अपनी मर्जी से कोई भी मनमाना बकाया वसूल नहीं कर सकते हैं। भुगतान की गणना करने के लिए जमा राशि, कुल बकाया राशि और उसी क्षेत्र के समान प्लॉट की मौजूदा कीमत को आधार बनाया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला सिरसा के सेक्टर-19 स्थित 450 वर्ग मीटर के एक आवासीय प्लॉट से जुड़ा हुआ है। इस प्लॉट को सितंबर 2008 में 29,94,750 रुपये की अस्थायी कीमत पर आवंटित किया गया था, और जुलाई 2010 में इसे दोबारा याचिकाकर्ताओं के नाम पर आवंटित किया गया।
शुरुआत में आवंटियों ने दो किस्तें जमा कराई थीं, लेकिन कारोबार में भारी नुकसान के कारण वे आगे की किस्तें नहीं भर सके। जुलाई 2021 में उन्हें पता चला कि उनका आवंटन रद्द कर दिया गया है, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के आवंटन रद्द करने के आदेशों को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को तयशुदा राशि जमा कराने पर प्लॉट बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत द्वारा तय किया गया भुगतान का फार्मूला
अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्लॉट की बहाली के लिए राशि तय करने का एक निश्चित तरीका अपनाया जाएगा:
- सबसे पहले आवंटन रद्द होने की तारीख तक जमा की गई कुल राशि का प्रतिशत निकाला जाएगा।
- इसके बाद बकाया प्रतिशत निर्धारित किया जाएगा।
- यदि उसी क्षेत्र या स्थिति वाले समान प्लॉट की हाल ही में कोई नीलामी हुई है, तो उसकी आरक्षित कीमत को आधार बनाया जाएगा।
- यदि नीलामी उपलब्ध नहीं है, तो मौजूदा कलेक्टर दर पर विचार किया जाएगा।

