करनाल में दो ट्रॉलियों से करीब 160 क्विंटल धान पकड़ा गया, आढ़ती का लाइसेंस 14 दिन के लिए निलंबित; सीमा और मंडियों में निगरानी बढ़ाई गई
Yuva Haryana: हरियाणा की अनाज मंडियों में उत्तर प्रदेश से धान पहुंचने के मामले सामने आने के बाद सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। बाहरी राज्यों से धान की आवक रोकने के लिए प्रतिबंध और निगरानी के बावजूद करनाल जिले की मंडियों में यूपी का धान पहुंचने की शिकायतें मिली हैं। इसी कड़ी में इंद्री अनाज मंडी में उत्तर प्रदेश से लाए गए धान के मामले में एक आढ़ती और उसकी फर्म के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। संबंधित फर्म का लाइसेंस भी 14 दिनों के लिए निलंबित किया गया है।
प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई 22 अक्टूबर को इंद्री मंडी में की गई जांच के बाद हुई। मामले ने इसलिए भी गंभीरता हासिल की है, क्योंकि सरकारी खरीद में किसानों की फसल का सत्यापन जरूरी है। यदि दूसरे राज्य से लाए गए धान को स्थानीय किसान की फसल बताकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने की कोशिश होती है, तो इससे सरकारी खरीद प्रणाली और हरियाणा के किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
इंद्री मंडी में दो ट्रॉलियों से 160 क्विंटल धान मिला
इंद्री के एसडीएम रमन गुप्ता ने 22 अक्टूबर को मंडी में निरीक्षण के दौरान धान से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जांच के लिए रोका। इनमें करीब 160 क्विंटल धान लदा हुआ था। अधिकारियों ने संबंधित आढ़ती से धान के स्रोत और मंडी में लाए जाने से जुड़े दस्तावेजों के बारे में जानकारी मांगी।
आढ़ती धान कहां से लाया गया था, इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद मार्केट कमेटी की ओर से संबंधित फर्म को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में स्पष्टीकरण मांगा गया। समयसीमा में जवाब नहीं मिलने पर मार्केट कमेटी सचिव अमित कुमार की शिकायत के आधार पर आढ़ती तेजिंदर सिंह और फर्म तेजिंदर सिंह सोहन लाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
इसके अतिरिक्त, संबंधित फर्म का लाइसेंस 14 दिनों के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। मामले में आरोपों की जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
MSP पर बिक्री से मुनाफे के आरोप
कुछ व्यापारियों द्वारा उत्तर प्रदेश के छोटे किसानों से कम कीमत पर धान खरीदकर हरियाणा की मंडियों में MSP पर बेचने की आशंका जताई गई है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यूपी में कुछ जगहों पर धान 1,600 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदे जाने और हरियाणा में ग्रेड-ए धान के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल के MSP का लाभ लेने की कोशिश हो सकती है।
इस अंतर से परिवहन और अन्य खर्चों से पहले प्रति क्विंटल लगभग 600 से 800 रुपये तक का संभावित मार्जिन बन सकता है। हालांकि, यह आरोपों और सूत्रों पर आधारित अनुमान है; इसे इस मामले में सिद्ध वित्तीय लाभ नहीं माना जा सकता।
आशंका यह भी जताई गई है कि कुछ मामलों में स्थानीय किसानों के पंजीकरण या गेट पास का दुरुपयोग कर बाहरी धान को हरियाणा में उगाई गई फसल के रूप में दिखाया जा सकता है। प्रशासन अब खरीद रिकॉर्ड और फसल के वास्तविक स्रोत का सत्यापन कर रहा है।
हरियाणा-UP बॉर्डर पर बढ़ाई गई निगरानी
मामला सामने आने के बाद करनाल जिला प्रशासन ने मंडियों और हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पर जांच तेज कर दी है। अतिरिक्त उपायुक्त राहुल रायया ने संबंधित एसडीएम और मंडियों के नोडल अधिकारियों को धान की आवक पर नजर रखने तथा सत्यापन के बिना किसी भी खेप को खरीद प्रक्रिया में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
घरौंडा के एसडीएम अनुभव मेहता और करनाल के एसडीएम देवेंद्र शर्मा ने भी मंडियों का निरीक्षण किया। अधिकारियों को संदिग्ध वाहनों की जांच करने और दस्तावेजों का मिलान करने को कहा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, सीमा और मंडी प्रवेश बिंदुओं पर कुछ धान से भरी ट्रॉलियों को वापस भी भेजा गया है।
किसान संगठनों ने विस्तृत जांच की मांग की
भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) ने आरोप लगाया है कि बाहरी राज्यों से सस्ता धान लाकर हरियाणा की मंडियों में बेचने से स्थानीय किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। संगठन के प्रवक्ता बहादुर सिंह मेहला ने खरीद प्रक्रिया की विस्तृत जांच, राइस मिलों के भौतिक सत्यापन और यदि किसी व्यापारी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आए तो सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन का कहना है कि हरियाणा के किसानों की फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और खरीद प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि धान कहां से आया, खरीद प्रक्रिया में किसी पोर्टल या गेट पास का दुरुपयोग हुआ या नहीं और इस मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका रही है या नहीं।

