Yuva Haryana : देशभर में चर्चा में रहा हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के हाई प्रोफाइल मामले में एक बड़ी अपडेट सामने आई है। दरअसल, बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई है।
उच्च न्यायालय ने दिवंगत वाई पूरन कुमार के परिवार को झटका देते हुए सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने माना है कि जांच में कोई देरी या लापरवाही नहीं हुई है। एसआईटी पहले से ही मामले की सही जांच कर रही है।
मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में अब तक की जांच में न तो कोई अनावश्यक देरी हुई और न ही लापरवाही बरती गई है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि स्वतंत्र एजेंसी को जांच सौंपने का कोई औचित्य नहीं बनता।
हाईकोर्ट का मानना है कि मामले की जांच पहले से ही विशेष जांच दल द्वारा की जा रही है। एसआईटी जांच में 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है और कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए है इसलिए सीबीआई जांच से जुड़ी याचिका निरस्त की जाती है।
वहीं यूटी प्रशासन की ओर से एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि मामले में 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जबकि अब तक 22 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पूरा सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किया जा चुका है और 21 साक्ष्य एकत्र कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
आपको यह भी बता दें कि वाई पूरन कुमार की आत्महत्या को एक महीने से ज्यादा का समय हो गया है। थोड़े दिन पहले ही इस मामले में एसआईटी जांच को लेकर खासा सवाल उठे थे।
विभिन्न प्रमुख अखबारों द्वारा चंडीगढ़ पुलिस की जांच पर बड़े सवाल उठाए गए और जांच को कछुआ चाल बताया गया। प्रकाशित खबरों में जानकारी दी गई थी कि पुलिस अभी तक सुसाइड नोट के अनुसार हुई एफआईआर में शामिल हरियाणा कैडर के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के बयान तक नहीं दर्ज कर सकी है। आरोप था कि एसआईटी अब तक इस मामले से जुड़े 12 लोगों के बयान दर्ज किए है, जिनमें अधिकतर कम रैंक कर्मचारी शामिल है।



