समचाना गांव में करीब 1.25 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप, 2023 की लोकपाल रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई में देरी पर अदालत ने जताई थी चिंता
Yuva Haryana: हरियाणा के रोहतक जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच के दायरे में आ गया है। हरियाणा सरकार ने मामले को जांच के लिए विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को इसकी जानकारी मिलने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 के लिए निर्धारित की है। साथ ही सरकार को तब तक की गई कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
मामला रोहतक जिले के सांपला ब्लॉक के समचाना गांव में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों और मजदूरी भुगतान में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। इस प्रकरण में सरकारी धन के दुरुपयोग और लाभार्थियों के खातों में पहुंची रकम के संदिग्ध लेनदेन के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
मुख्य सचिव ने 15 अक्टूबर को भेजा था जांच का पत्र
25 अक्टूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से बताया गया कि मुख्य सचिव ने 15 अक्टूबर 2026 को मामले की जांच विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपने के लिए पत्र भेजा था।
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सरकार की ओर से जांच के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने अगली सुनवाई फरवरी 2027 में तय कर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि अगली तारीख पर मामले में हुई जांच और कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
इससे पहले अदालत ने मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने के लिए रोहतक के उपायुक्त से व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा था।
2023 की लोकपाल रिपोर्ट में उठे थे सवाल
यह मामला वर्ष 2023 में मनरेगा लोकपाल के समक्ष की गई शिकायतों से जुड़ा है। रिपोर्ट में कथित तौर पर योजना के धन के डायवर्जन और अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। लोकपाल ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।
सितंबर 2026 में हाई कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई थी कि लोकपाल की रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में तथ्यों की पुष्टि होने के बावजूद लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने जिला प्रशासन से मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
अदालत की चिंता केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह भी थी कि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अब विजिलेंस जांच के जरिए मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
समचाना गांव में 1.25 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी
समचाना गांव में मनरेगा के तहत करीब 1.25 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का अनुमान सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों के नाम पर मजदूरी का भुगतान दर्ज किया गया, जबकि संबंधित लोगों ने योजना के तहत काम करने से इनकार किया।
जांच से जुड़े दस्तावेजों में कुछ लाभार्थियों के बैंक खातों में मनरेगा की रकम जमा होने के बाद उसी धनराशि को एक ही मोबाइल नंबर या UPI खाते में स्थानांतरित किए जाने की बात भी सामने आई। एक मृत व्यक्ति के नाम पर 10,395 रुपये के भुगतान का आरोप भी रिपोर्टों में दर्ज है।
इन आरोपों के संबंध में सितंबर 2026 में सांपला पुलिस ने मनरेगा से जुड़े एक मेट, प्रवीण कुमार, के खिलाफ मामला दर्ज किया था। प्राथमिकी में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न आरोप शामिल किए गए। FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है।
अब विजिलेंस जांच पर रहेगी नजर
विजिलेंस ब्यूरो की जांच में कथित वित्तीय अनियमितताओं, भुगतान के रिकॉर्ड, लाभार्थियों के बैंक लेनदेन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। हाई कोर्ट ने सरकार से अगली सुनवाई तक कार्रवाई की प्रगति बताने को कहा है।
अब इस मामले में 15 फरवरी 2027 की सुनवाई अहम होगी। उस दिन अदालत के सामने जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति रखी जानी है। जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गड़बड़ी में किन लोगों की भूमिका थी और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

