Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्य में पहली बार धान की खरीद को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार ने धान (मोटे धान) की खरीद के लिए जिलावार प्रति एकड़ लिमिट तय कर दी है। अब मंडियों में तय सीमा के आधार पर ही किसानों से फसल खरीदी जाएगी। यदि कोई किसान तय सीमा से अधिक धान मंडी में लाता है, तो उसकी जांच कराई जाएगी।
सरकार ने कृषि विभाग से वर्ष 2023, 2024 और 2025 के धान उत्पादन के औसत आंकड़ों के आधार पर यह लिमिट तय की है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को ये आंकड़े भेज दिए गए हैं और इन्हें ‘किसान ऐप’ में दर्ज किया गया है।
कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा, पलवल में सबसे कम लिमिट: प्रदेश में सबसे अधिक खरीद सीमा कुरुक्षेत्र जिले के लिए तय की गई है, जबकि सबसे कम सीमा पलवल जिले के लिए है:
कुरुक्षेत्र: 29.26 क्विंटल प्रति एकड़
फतेहाबाद: 28.31 क्विंटल प्रति एकड़
कैथल: 27.29 क्विंटल प्रति एकड़
यमुनानगर: 27.73 क्विंटल प्रति एकड़
अंबाला: 26.26 क्विंटल प्रति एकड़
करनाल: 25.25 क्विंटल प्रति एकड़
सिरसा: 24.84 क्विंटल प्रति एकड़
रोहतक: 24.61 क्विंटल प्रति एकड़
हिसार/हांसी: 21.77 क्विंटल प्रति एकड़
पलवल: 21.39 क्विंटल प्रति एकड़
केंद्र के निर्देश: 58 लाख टन से ज्यादा न खरीदें धान
केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय ने हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बार 58 लाख टन से अधिक धान की खरीद न की जाए।
पिछली बार सरकार ने 62 लाख टन से अधिक धान खरीदा था, जिससे राज्य में अतिरिक्त चावल का उत्पादन हो गया था। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने इस अतिरिक्त चावल को लेने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते वर्तमान में भी करीब ढाई लाख टन चावल हरियाणा में पड़ा हुआ है।
भाकियू की मांग: “दाना-दाना खरीदने का वादा निभाए सरकार”
सरकार के इस फैसले पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने कड़ा विरोध जताया है। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान के अनुसार, सरकार को हर हाल में किसानों की पूरी फसल खरीदनी चाहिए।
किसान नेताओं का कहना है कि:
- कमजोर मानसून के बावजूद किसानों ने धान उगाया है।
- यदि किसी के खेत में औसत से ज्यादा उत्पादन हुआ है, तो बचे हुए धान को किसान कहां बेचेगा?
- किसानों के पास अतिरिक्त धान घर में स्टोर करने की जगह नहीं होती।
- मंडी में बिक्री बंद होने के बाद किसानों को मजबूरी में कम दामों पर धान बेचना पड़ सकता है।
धान मिलिंग पर संकट: यूपी-पंजाब के मिलर्स की ली जाएगी मदद
हरियाणा में धान मिलिंग (Rice Milling) को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य में अब तक केवल 415 राइस मिलरों ने ही पंजीकरण कराया है। इस समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश और पंजाब के राइस मिलों को धान देने का फैसला लिया गया है। अधिकारियों की टीमें जल्द ही दोनों राज्यों का दौरा करेंगी।
इसके अलावा, सरकार ने 2025-26 में धान मिलिंग और कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की केंद्रीय पूल में डिलीवरी की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दी है।
बाजरे का भाव 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय
सरकार ने बाजरा उत्पादक किसानों के लिए ‘भावांतर भरपाई योजना’ के तहत बाजरे का भाव 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसमें सरकार 2300 रुपये देगी और बाकी अंतर की भरपाई सरकार करेगी। बाहरी राज्यों से बाजरे की आवक को रोकने के लिए सीमाओं पर पुलिस बल तैनात रहेगा।

