चार राज्यों से मांगी गई मदद, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा- कर्मचारियों के साथ बातचीत के लिए सरकार तैयार
Yuva Haryana: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली व्यवस्था और विभागीय कामकाज को लेकर चिंता बढ़ गई है। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस देने के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि निजी कंपनी को वितरण व्यवस्था सौंपने से सरकारी बिजली निगमों और कर्मचारियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। इस बीच राज्य सरकार ने स्थिति संभालने के लिए कदम उठाए हैं और बिजली व्यवस्था सुचारु रखने के लिए दूसरे राज्यों से भी मदद मांगी है।
कर्मचारियों ने बुधवार को हड़ताल शुरू की। सरकार ने बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगभग 25 हजार कर्मचारियों की तत्काल ड्यूटी लगाने की तैयारी की। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से तकनीकी स्टाफ की मदद मांगी गई है। सरकार का प्रयास है कि हड़ताल के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों और जरूरी सेवाओं को बिजली आपूर्ति में परेशानी न हो।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी इलेवन पावर को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के प्रस्ताव का बिजली कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा में निजी कंपनी को समानांतर व्यवस्था देने से मौजूदा बिजली निगमों पर दबाव बढ़ सकता है।
कर्मचारियों ने इस फैसले को लेकर सरकार के सामने अपनी आपत्तियां रखी हैं। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों की नौकरी, सेवा शर्तों और भविष्य की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन तेज किया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ की बैठक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऊर्जा मंत्री अनिल विज और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। बैठक में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर भी चर्चा हुई।
सरकार ने आयोग के आदेश के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले में आगे की प्रक्रिया तेज की जाए। सरकार की ओर से कर्मचारियों के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि कर्मचारियों की चिंताओं को सुनकर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, हड़ताल समाप्त होने और निजी कंपनी के लाइसेंस को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
हड़ताल के कारण बिजली वितरण और शिकायतों के निपटारे में बाधा आने की आशंका को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया है। दूसरे राज्यों से तकनीकी कर्मचारियों की मदद मांगी गई है। इसके अलावा, बिजली निगमों में उपलब्ध कर्मचारियों और अधिकारियों को आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के लिए तैनात करने की योजना है।
सरकार की प्राथमिकता है कि बिजली आपूर्ति बाधित न हो और उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर समाधान किया जा सके। खासतौर पर अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति और अन्य जरूरी सेवाओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
किसान और कर्मचारी संगठनों का समर्थन
बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को कुछ किसान और मजदूर संगठनों का भी समर्थन मिला है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी), क्रांतिकारी किसान यूनियन और अन्य संगठनों ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में आवाज उठाई है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े फैसलों में कर्मचारियों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका विरोध केवल लाइसेंस देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे नौकरी की सुरक्षा, सेवा शर्तों और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था के भविष्य को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
हड़ताल से जुड़े तीन प्रमुख सवाल
इस विवाद में तीन मुद्दे सबसे अहम हैं। पहला, निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले पर कानूनी प्रक्रिया क्या रुख लेती है। दूसरा, हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति कितनी सुचारु रहती है। तीसरा, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई सहमति बन पाती है या नहीं।
फिलहाल सरकार ने वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था और कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए हैं। वहीं, कर्मचारियों का विरोध जारी रहने से बिजली विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में बातचीत और कानूनी प्रक्रिया इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।

