Yuva Haryana : हरियाणा में धान खरीद सीजन की शुरुआत इस बार कई प्रशासनिक अड़चनों के कारण प्रभावित होती दिखाई दे रही है। सरकार द्वारा 29 सितंबर से धान खरीद शुरू करने की घोषणा किए जाने के बावजूद कई मंडियों में खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से शुरू नहीं हो सकी, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
धान खरीद में देरी के पीछे प्रमुख कारणों में चावल मिल मालिकों की नाराजगी, पटवारियों की हड़ताल और विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने में हुई देरी को माना जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों और फसल उठान व्यवस्था पर पड़ा है।
खरीद शुरू, लेकिन उठान की रफ्तार धीमी
प्रदेश की मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है। शुरुआती दिनों में लाखों क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है, लेकिन उठान की गति अपेक्षाकृत धीमी रहने से किसानों को अपनी उपज मंडियों में रोककर रखनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि समय पर उठान नहीं होने से मंडियों में जगह की कमी हो रही है और नई फसल लाने में दिक्कतें आ रही हैं।
चावल मिल मालिकों और सरकार के बीच विवाद
राज्य के लगभग 1400 चावल मिल मालिकों में से बड़ी संख्या ने प्रारंभिक चरण में पंजीकरण नहीं कराया। मिल मालिकों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित कुछ शर्तों और भुगतान संबंधी मुद्दों को लेकर उनकी आपत्तियां थीं।
बाद में सरकार और मिलर्स के बीच बातचीत के बाद स्थिति में सुधार हुआ और अधिकांश मिल मालिकों ने पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर ली। इसके बाद खरीद और उठान प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
पटवारियों की हड़ताल का भी असर
धान खरीद सीजन के दौरान पटवारियों की हड़ताल ने भी फसल सत्यापन और पंजीकरण प्रक्रिया को प्रभावित किया। कई किसानों को समय पर सत्यापन न होने के कारण अपनी फसल बेचने में परेशानी हुई।
हालांकि सरकार द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य अधिकारियों की ड्यूटी लगाकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया, लेकिन शुरुआती दिनों में इसका असर साफ दिखाई दिया।
दोबारा पंजीकरण से बढ़ी परेशानी
कई किसानों को फसल पंजीकरण संबंधी तकनीकी समस्याओं के कारण दोबारा पंजीकरण करवाना पड़ा। इससे खरीद प्रक्रिया में देरी हुई और किसानों को अतिरिक्त समय तथा संसाधन खर्च करने पड़े।
विशेष रूप से उन किसानों को अधिक परेशानी हुई जिनकी फसल का डेटा पोर्टल पर सही तरीके से अपडेट नहीं हो पाया था।
आढ़तियों ने भी जताई नाराजगी
मंडियों में आढ़तियों ने भी भुगतान और खरीद व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान और स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने से खरीद प्रक्रिया और अधिक सुचारु हो सकती है।
किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद
सरकार का कहना है कि खरीद, उठान, पंजीकरण और सत्यापन से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और धान खरीद प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।
धान खरीद सीजन हरियाणा के लाखों किसानों की आय से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और प्रशासन जल्द सभी बाधाओं को दूर कर खरीद व्यवस्था को पूरी तरह सुचारु बनाएंगे।

