Yuva Haryana : हरियाणा में धान खरीद के दौरान हुई बड़ी गड़बड़ियों की परते धीरे-धीरे खुल रही है। करनाल में धान घोटाले की जांच को तेज कर दिया गया है।
जांच के दौरान एक नया खुलासा हुआ है। दरअसल, फर्जी गेट पास काटने के बाद असंध क्षेत्र के गांवों के 25 किसानों के खाते में रुपए डाले गए थे। पुलिस ने इन सभी के खाते फ्रीज करवा दिए है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आ रही है कि किसानों का कहना है कि उन्होंने न तो धान उगाया था और न ही धान मंडी में बेचा।
किसानों का कहना है कि आढ़तियों के कहने पर ही पोर्टल पर पंजीकरण कराया गया था। पुलिस जांच अब आढ़तियों और मिलर्स पर आ गई है। शक के दायरे में आए आढ़तियों के जे फार्म और आई फार्म की जांच की जा रही है।
ऐसे में यही लग रहा है कि धान की फसल केवल कागजों में थी और फर्जीवाड़ा कर भुगतान ले लिया गया। धान के लिए जो पैसा किसानों के खाते में आया, उसे आढ़तियों के माध्यम से लेकर मिलर, आढ़ती, मार्केट कमेटी के अधिकारियों और खरीद एजेंसियों ने बांट लिया गया।
आपको बता दें कि असंध की दो मिल को हैफेड द्वारा धान अलॉट किया गया था। फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान दोनों में नौ करोड़ रुपए से अधिक का धान कम मिला है।
पुलिस अब तक दो मिलर्स को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं इस मामले में एक डीएम, दो इंस्पेक्टरों को निलंबित किया जा चुका है।
जांच में यह भी सामना आया है कि मिलर्स, आढ़तियों और अधिकारियों की मिलीभगत से ही फर्जी गेट पास बनाए गए और बिना धान खरीदें ही उसे मिलों में दिखाया गया।
पुलिस ने जब उन खातों की जांच की, जिसमें धान बिकने के बाद सरकार की ओर से रुपए डाले गए तो ऐसे 25 किसान सामने आए, जिन्होंने असल में धान बेचा ही नहीं था।
ज्यादातर किसानों का पुलिस को कहना है कि उन्होंने धान बेचा ही नहीं। ऐसे में इस मामले में अब कई आढ़तियों पर कार्रवाई होना तय है।
उधर, यमुनानगर में भी धान घोटाले का मामला सामने आया है। यहां राइस मिलों में जब्त किए गए करोड़ों रुपए के धान पर स्वामित्व को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।
बुधवार को इस मामले में सुनवाई भी हुई। कोर्ट में हैफेड और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने अपना-अपना दावा जताया। फिलहाल, कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 नवंबर तय की है।



