Yuva Haryana: देश के बड़े शहरों में नौकरी करने वाले युवाओं के लिए किराया हर महीने के बजट का बड़ा हिस्सा होता है। आमतौर पर लोग कम किराए वाले इलाके में घर तलाशते हैं, लेकिन गुरुग्राम की एक महिला ने इससे बिल्कुल अलग फैसला लिया है। वह अपनी सैलरी का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा किराए पर खर्च करती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शक्ति धारणी पांडे ने बताया कि वह अपने कार्यस्थल के बेहद करीब रहती हैं। उनका घर उनके स्कूल से महज चार मिनट की दूरी पर है। उनका कहना है कि महंगा किराया देने के बावजूद इस घर ने उन्हें आने-जाने में लगने वाले समय, ऊर्जा और मानसिक तनाव से बचाया है।
सस्ता घर छोड़कर महंगा घर क्यों चुना ?
शक्ति के मुताबिक उनके पास इससे कम किराए वाले इलाके में रहने का विकल्प मौजूद था। हालांकि, वहां से रोजाना काम पर आने-जाने में काफी समय खर्च होता। उन्होंने इसके बजाय ऐसी जगह रहना चुना जहां से वह कुछ ही मिनटों में अपने कार्यस्थल पहुंच सकें।
उनका तर्क है कि घर का किराया सिर्फ रहने की जगह की कीमत नहीं है, बल्कि इससे मिलने वाला समय और मानसिक सुकून भी महत्वपूर्ण है। काम की जगह के पास रहने से वह यात्रा में खर्च होने वाला समय अपने दूसरे कामों और व्यक्तिगत लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल कर पाती हैं।
‘मैं अपनी कमाई खुद पर लगा रही हूं’
शक्ति ने अपने फैसले को लेकर कहा कि वह अपनी कमाई का एक हिस्सा खुद पर खर्च कर रही हैं। उनके लिए घर का अधिक किराया केवल एक खर्च नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी को सुविधाजनक बनाने का तरीका है।
काम के पास रहने के कारण उन्हें लंबे सफर से बचने का फायदा मिलता है। इससे उन्हें अपने रोजमर्रा के काम, घर के काम और व्यक्तिगत प्रोजेक्ट्स के लिए भी ज्यादा समय मिल जाता है।
SIP और बचत को लेकर भी हुई चर्चा
शक्ति की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई कि युवाओं को अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा बचत और निवेश में लगाना चाहिए या फिर बेहतर जीवनशैली और मानसिक सुकून के लिए खर्च करना उचित है।
उनकी सोच पारंपरिक वित्तीय सलाह से अलग दिखाई देती है। जहां एक ओर विशेषज्ञ आमतौर पर आय का एक हिस्सा बचाने और निवेश करने पर जोर देते हैं, वहीं शक्ति का कहना है कि समय और मानसिक शांति की भी अपनी आर्थिक कीमत है।
सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
महिला के वीडियो के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनके फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि रोजाना लंबा सफर करने की तुलना में घर और ऑफिस के बीच कम दूरी जीवन की गुणवत्ता को बेहतर कर सकती है।
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि आय का आधे से अधिक हिस्सा किराए में खर्च करना लंबे समय में आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि यह मामला केवल एक महिला के किराए के फैसले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पैसे, समय, मानसिक शांति और जीवनशैली के बीच संतुलन पर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है इस कहानी का बड़ा सवाल ?
गुरुग्राम जैसे महंगे शहरों में रहने वाले युवाओं के सामने अक्सर यह सवाल होता है कि कम किराए के लिए लंबा सफर चुना जाए या ज्यादा किराया देकर काम के करीब रहा जाए। शक्ति धारणी पांडे का फैसला साफ तौर पर दूसरे विकल्प के पक्ष में है। उनका मानना है कि बचाया हुआ समय और ऊर्जा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी बैंक खाते में बचाई गई रकम।

