गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को मिले समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लेकर विवाद जारी; सरकार ने विद्युत अधिनियम की धारा 108 का दिया हवाला
Yuva Haryana: हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनी को दिए गए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। राज्य सरकार ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) को निर्देश भेजकर प्रदेश में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस नहीं बनाने, संचालित करने या प्रभावी करने से रोकने को कहा है। सरकार के इस कदम को बिजली कर्मचारियों के साथ हुए समझौते को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह विवाद उस समय बढ़ा था, जब HERC ने 19 अक्टूबर 2026 को Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का आदेश जारी किया। सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इस फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया था। बाद में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बाद तीन दिवसीय हड़ताल समाप्त करने पर सहमति बनी।
सरकार ने विद्युत अधिनियम की धारा 108 का किया इस्तेमाल
राज्य सरकार ने अपने निर्देश में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 की उपधारा (1) का हवाला दिया है। इस प्रावधान के तहत राज्य सरकार सार्वजनिक हित से जुड़े नीतिगत मामलों में नियामक आयोग को दिशा-निर्देश दे सकती है।
सरकार ने अपने रुख के समर्थन में राज्य के राजस्व पर संभावित वित्तीय प्रभाव, बिजली उपभोक्ताओं के हित और व्यापक जनहित को प्रमुख आधार बताया है। निर्देशों में आयोग से कहा गया है कि हरियाणा में कहीं भी समानांतर वितरण लाइसेंस का सृजन, संचालन या उसे प्रभावी न किया जाए।
हालांकि, सरकार की ओर से निर्देश जारी होने और पहले से दिए गए लाइसेंस के औपचारिक रूप से रद्द होने में अंतर है। लाइसेंस पर अंतिम स्थिति आयोग की आगे की कार्रवाई और लागू कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
पंचकूला में बैठक के बाद खत्म हुई हड़ताल
इस मामले में ऊर्जा मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में पंचकूला में बिजली कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी। बातचीत के दौरान सरकार ने कर्मचारियों की चिंताओं पर कार्रवाई करने और निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस के मामले में कानूनी कदम उठाने का आश्वासन दिया।
इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने अपनी तीन दिवसीय हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। हड़ताल के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं और कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल समाप्त होने के बाद बिजली आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश भी दिए गए।
कर्मचारी संगठनों ने कहा- अंतिम आदेश तक नजर रहेगी
कर्मचारी संयुक्त मोर्चा और बिजली क्षेत्र के संगठनों ने समानांतर लाइसेंस को सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था के लिए चुनौती बताया था। उनका तर्क है कि गुरुग्राम और नूंह जैसे औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में निजी कंपनी को अलग वितरण नेटवर्क चलाने की अनुमति मिलने से सरकारी बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव पड़ सकता है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार के आश्वासन से तत्काल गतिरोध दूर हुआ है, लेकिन उनकी मांग का स्थायी समाधान तभी माना जाएगा, जब लाइसेंस को लेकर अंतिम और स्पष्ट कानूनी आदेश सामने आएगा। इसलिए कर्मचारी संगठन इस मामले में आयोग की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।
उपभोक्ताओं और सरकारी बिजली कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
गुरुग्राम और नूंह में फिलहाल दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) बिजली वितरण का काम करता है। समानांतर लाइसेंस के तहत निजी कंपनी को भी उसी क्षेत्र में बिजली वितरण की अनुमति मिल सकती थी। इस व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों ने सरकारी बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए थे।
यदि आयोग सरकार के निर्देशों के अनुरूप लाइसेंस पर रोक लगाने या उसे रद्द करने की कार्रवाई करता है, तो इससे सरकारी वितरण व्यवस्था की मौजूदा स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि, बिजली दरों, सेवा की गुणवत्ता या उपभोक्ताओं के खर्च पर इसका वास्तविक प्रभाव आगे के फैसलों और नियामक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
अब सभी की निगाहें HERC की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सरकार के निर्देशों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग समानांतर लाइसेंस के आदेश पर क्या कदम उठाता है और इस विवाद का अंतिम कानूनी समाधान किस तरह सामने आता है।

