गुरुग्राम-नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस पर विवाद तेज, ऊर्जा विभाग आयोग में समीक्षा याचिका दायर करेगा
Yuva Haryana: हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी बिजली कंपनी को दिए गए समानांतर वितरण लाइसेंस को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) को पत्र और ई-मेल भेजकर प्रदेश में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस नहीं बनाने, संचालित करने या प्रभावी करने के निर्देश दिए हैं। सरकार अब आयोग के 19 अक्टूबर 2026 के फैसले को चुनौती देने के लिए समीक्षा याचिका दायर करने की तैयारी भी कर रही है।
यह मामला उस समय गंभीर हो गया, जब HERC ने Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया। इसके विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल शुरू की थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज की मौजूदगी में कर्मचारी नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद हड़ताल समाप्त करने पर सहमति बनी।
विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत निर्देश
सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 की उपधारा (1) के तहत HERC को निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि समानांतर लाइसेंस से राज्य के राजस्व, सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों पर असर पड़ सकता है।
निर्देशों के अनुसार, आयोग को हरियाणा में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का सृजन, संचालन या उसे प्रभावी नहीं करना चाहिए। सरकार ने इसे मौजूदा नीति और जनहित से जुड़ा विषय बताया है।
हालांकि, सरकार के निर्देश और पहले से जारी लाइसेंस को औपचारिक रूप से रद्द करने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। अंतिम स्थिति HERC की आगे की कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
ऊर्जा विभाग दायर करेगा समीक्षा याचिका
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सरकार आयोग के फैसले के खिलाफ कानूनी कदम उठाएगी। इसके तहत विद्युत अधिनियम की धारा 94 के अंतर्गत समीक्षा याचिका दायर करने की तैयारी है। इस याचिका में आयोग से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की जाएगी।
HERC ने 19 अक्टूबर को Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह के राजस्व जिलों में बिजली वितरण का लाइसेंस दिया था। इन क्षेत्रों में फिलहाल दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) बिजली आपूर्ति करता है। निजी कंपनी को लाइसेंस मिलने के बाद उपभोक्ताओं के लिए वितरण कंपनी चुनने की संभावित व्यवस्था पर चर्चा शुरू हुई थी।
सरकार ने फैसले पर क्यों जताई चिंता ?
सरकार और बिजली कर्मचारी संगठनों ने निजी कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारी और पूरे लाइसेंस क्षेत्र में बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता को लेकर सवाल उठाए हैं। आशंका जताई गई है कि निजी कंपनी अधिक राजस्व देने वाले औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकती है। इससे सरकारी बिजली निगमों की आय और पहले से किए गए बिजली खरीद समझौतों पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, एक ही क्षेत्र में दो वितरण नेटवर्क विकसित करने से बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। सरकार का कहना है कि इन संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ता हित और जनहित की रक्षा करना जरूरी है।
हड़ताल खत्म, लेकिन कर्मचारियों का संघर्ष जारी
बिजली कर्मचारी संगठनों ने लाइसेंस के फैसले को कर्मचारियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा मुद्दा बताया था। सरकार की ओर से हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई के आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई, ताकि बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम सामान्य रूप से चल सके।
हालांकि, कर्मचारी नेताओं का कहना है कि केवल आश्वासन से विवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा। उनका जोर है कि लाइसेंस के मामले में अंतिम कानूनी फैसला सामने आना चाहिए। हड़ताल में शामिल नहीं होने वाले कुछ कर्मचारियों और यूनियन पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की है। इस संबंध में कार्रवाई की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
अब आगे क्या होगा?
अब ऊर्जा विभाग की समीक्षा याचिका और HERC की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। आयोग सरकार के निर्देशों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद आगे का आदेश जारी कर सकता है। फिलहाल निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस औपचारिक रूप से रद्द होने की पुष्टि के बिना इसे रद्द घोषित करना उचित नहीं होगा।
इस विवाद का अंतिम परिणाम तय करेगा कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण की व्यवस्था किस रूप में आगे बढ़ेगी और सरकारी बिजली निगमों, कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।

