Yuva Haryana: प्रदेश में खरीफ विपणन सीजन के तहत धान की खरीद जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को फसल बेचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश की मंडियों में अब तक 1.80 लाख टन धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से केवल 12 हजार टन की ही बोली हो पाई है। वहीं, 31 हजार से अधिक गेटपास कट चुके हैं, परंतु नमी और तकनीकी कमियों के कारण खरीद प्रक्रिया रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।
किसानों की मुख्य समस्याएं
- जिला सीमा की बंदिश और गेटपास की समस्या
सीमावर्ती गांवों के किसान वर्षों से अपनी नजदीकी मंडी में फसल बेचते आ रहे हैं। उदाहरण के लिए, जींद जिले के कई गांवों के किसान पास की कैथल मंडी में धान लाते रहे हैं। हालांकि, इस बार पोर्टल/ऐप पर गेटपास बनाते समय किसानों को केवल अपने ही जिले की मंडियों का विकल्प मिल रहा है, जिससे वे दूसरे जिले की नजदीकी मंडी के लिए गेटपास नहीं कटा पा रहे हैं।
- सैटेलाइट सर्वे और रकबे का मिसमैच
हर्सेक (HARSAC) द्वारा किए गए सैटेलाइट सर्वे के अनुसार प्रदेश में 22.34 लाख एकड़ रकबे में मिसमैच पाया गया है—यानी पोर्टल पर दर्ज फसल और खेत में खड़ी फसल का मिलान नहीं हुआ है।
- अब तक केवल 13 लाख 23 हजार 67 एकड़ रकबे का ही पटवारियों द्वारा भौतिक सत्यापन हो पाया है।
- जब तक सत्यापन पूरा नहीं होता, तब तक किसानों का गेटपास जारी नहीं किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार पिछले सीजन में फर्जी गेटपास के जरिए हुई गड़बड़ियों और फर्जी खरीद को रोकने के लिए इस बार सैटेलाइट सर्वे आधारित कड़े कदम उठाए गए हैं।
पीड़ितों का दर्द (किसान क्या बोले)
राजेश (गांव पेंगा, जींद): “करीब 50 वर्ष से कैथल मंडी में फसल बेच रहे हैं। इस बार 5 एकड़ पीआर धान लेकर कैथल पहुंचे, लेकिन गेटपास नहीं कटा।”
वीरेंद्र (गांव शामदों, जींद): “3 एकड़ धान कैथल मंडी में बेचने आए, लेकिन पोर्टल केवल जींद जिले की मंडी में फसल बेचने का विकल्प दे रहा है।”
बलदेव (गांव पोपड़ा, करनाल): “हर साल जींद की पिल्लूखेड़ा मंडी में फसल बेचते हैं। सत्यापन के बाद फसल बिकने की बात कही जा रही है, लेकिन यह कब पूरा होगा, कुछ स्पष्ट नहीं है।”
राइस मिलर्स के लिए राहत के बड़े फैसले
धान खरीद के बीच प्रदेश सरकार ने राइस मिलर्स को बड़ी राहत दी है:
बाउंड्री वॉल की शर्त खत्म: एक ही परिसर में अलग-अलग मशीनरी व बिजली कनेक्शन से संचालित दो मिलों के बीच अब बाउंड्री वॉल बनाना अनिवार्य नहीं रहेगा।
वित्तीय सुरक्षा राशि में छूट: खरीफ विपणन सीजन 2026-27 की मिलिंग पॉलिसी में FDR राशि को घटाकर ₹15 लाख प्रति MT कर दिया गया है।
बोनस का त्वरित भुगतान: सीएमआर (CMR) डिलीवरी के बोनस का भुगतान जल्द करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रकों को मिलर्स के सभी लंबित भुगतान तुरंत जारी करने को कहा गया है।

