नारायणगढ़ में अदालत के आदेश पर कार्रवाई, उत्तर प्रदेश में एक करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी चेक मामले के जरिए ब्लैकमेल करने का आरोप
Yuva Haryana: हरियाणा के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त और उद्यमी अशोक मेहता से कथित तौर पर 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में नारायणगढ़ पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक पुरानी फर्म का ब्लैंक चेक चोरी कर उसमें एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि भरकर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मामला दर्ज कराया गया और बाद में इसी मामले को निपटाने के बदले पैसे मांगे गए। पुलिस ने अदालत के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुराने चेक से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का आरोप
शिकायतकर्ता अशोक मेहता रुबिकॉन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। उन्होंने उपमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में याचिका दायर कर चेक चोरी और कथित फर्जीवाड़े की शिकायत की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2011 में स्थापित एक पुरानी पार्टनरशिप फर्म के पूर्व अकाउंटेंट संग्राम परिडा ने फैक्टरी में काम करने के दौरान फर्म का एक खाली चेक कथित रूप से चोरी कर लिया था। आरोप है कि इसके बाद चेक पर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि भरकर मुजफ्फरनगर की अदालत में चेक बाउंस से संबंधित मामला दर्ज कराया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का उस पुरानी पार्टनरशिप फर्म से कोई संबंध नहीं था। मामले में माल की आपूर्ति दिखाने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ वाहन नंबरों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी।
मामले को निपटाने के बदले 25 लाख मांगने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, अगस्त 2025 के पहले सप्ताह में पंकज धींगड़ा अपने साथियों के साथ नारायणगढ़ स्थित शिकायतकर्ता के आवास पर पहुंचा। आरोप है कि वहां कथित तौर पर 25 लाख रुपये की मांग की गई और रकम नहीं देने पर शिकायतकर्ता तथा उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कथित रंगदारी की मांग पुराने चेक से जुड़े मुकदमे को खत्म कराने के नाम पर की गई थी। मामले में उत्तर प्रदेश निवासी पंकज धींगड़ा और प्रियंका धींगड़ा के साथ ओडिशा निवासी संग्राम परिडा को आरोपी बनाया गया है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम की वास्तविकता जांच के बाद स्पष्ट होगी।
पहले भी पुलिस अधिकारियों से की थी शिकायत
रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने इससे पहले अंबाला रेंज के पुलिस महानिदेशक और स्थानीय पुलिस अधिकारियों के समक्ष भी शिकायत दी थी। शुरुआती स्तर पर मामला उत्तर प्रदेश से जुड़ा होने के कारण क्षेत्राधिकार को लेकर सवाल उठे थे।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने मामले में कथित रंगदारी और धमकी की घटना नारायणगढ़ में होने के पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
अदालत के आदेश के बाद नारायणगढ़ थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
बैंक रिकॉर्ड और फोरेंसिक जांच करेगी पुलिस
पुलिस अब मामले से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, चेक के इस्तेमाल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल भी कार्रवाई का हिस्सा होगी।
मामले की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि कथित चेक फर्जीवाड़े और रंगदारी की मांग के बीच क्या संबंध था। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

