Yuva Haryana: जून माह में हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में एक चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे है।
दरअसल, छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के इस मामले को लेकर मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया गया है। एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार मंडलायुक्त की जांच में सामने आया है कि एचएयू में छात्रों पर बल प्रयोग करने की जरूरत नहीं थी।
28 पेज की रिपोर्ट में एचएयू प्रशासन की उदासीनता, मेडिकल व्यवस्था में लापरवाही और पुलिस की देरी को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार घायल छात्रों को समय पर मेडिकल सुविधा नहीं मिली और एमएलआर तैयार करने में भी परेशानियां पैदा की गई। उस दौरान जांच में स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा लापरवाही बरतने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
लाठीचार्ज के इस मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बावजूद भी चालान दाखिल करने में देरी की गई, जिसका रिपोर्ट में जिक्र किया गया है।
तत्कालीन मंडलायुक्त के बयान के अनुसार एचएयू लाठीचार्ज मामले को लेकर सभी पक्षों से वार्ता के बाद रिपोर्ट तैयार की गई थी और इस रिपोर्ट को सरकार के पास भी भेज दिया गया है। अब इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
आपको बता दें कि 10 जून, 2025 को विश्वविद्यालय परिसर में स्कॉलरशिप नीति में बदलाव के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर कुलपति कार्यालय की ओर जा रहे एचएयू के छात्रों पर बल प्रयोग किया गया था, जिसमें कई विद्यार्थियों को गंभीर चोटें लगी थी। इसके बाद यह मामला खास चर्चा में रहा था। विद्यार्थी एचएयू में धरने पर बैठ गए थे और बड़े-बड़े राजनेताओं का भी विद्यार्थियों को समर्थन मिला था। यहां तक कि राज्यपाल तक भी यह मामला उठाया गया था।



