Yuva Haryana: देश में ‘मिशन एड्स सुरक्षा’ (Mission AIDS Suraksha) के तहत दिसंबर 2027 तक एचआईवी नियंत्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कुरुक्षेत्र जिले ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘सुरक्षित’ (Surakshit) का दर्जा प्राप्त कर लिया है। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र यह स्टेटस पाने वाला हरियाणा का पहला जिला बन गया है।
वैश्विक 95-95-95 लक्ष्यों का सफर
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले ने एचआईवी नियंत्रण के लिए वैश्विक 95-95-95 के लक्ष्यों को पूरा कर यह मुकाम हासिल किया है। इस ढांचे के तहत एचआईवी के साथ जी रहे 95 प्रतिशत लोगों को उनकी स्थिति के बारे में पता होना, उनमें से 95 प्रतिशत का एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) पर होना और उपचार प्राप्त कर रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरल लोड का सप्रेस होना शामिल है, जिससे संक्रमण काफी हद तक कम होता है और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
आंकड़ों पर एक नजर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
- कुरुक्षेत्र में एचआईवी के साथ लगभग 2,436 लोग रह रहे हैं।
- इनमें से 2,306 मरीज पंजीकृत हैं, जिनमें से 2,269 लोग नियमित रूप से एआरटी (ART) थेरेपी ले रहे हैं।
- लगभग 1,806 मरीजों ने वायरल सप्रेसिव लेवल हासिल कर लिया है।
- जिले में लोकनायक जयप्रकाश जिला सिविल अस्पताल, कुरुक्षेत्र सहित लाडवा, पिहोवा और शाहबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत कुल पांच इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (ICTC) सक्रिय हैं।
जागरूकता और रोकथाम के विशेष प्रयास
डिप्टी सिविल सर्जन और जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण अधिकारी डॉ. रमेश सभरवाल ने बताया कि सुरक्षित सेक्स और उपयोग की गई सीरिंज का इस्तेमाल एचआईवी मामलों का मुख्य कारण है। जोखिम वाले समूहों जैसे कि प्रवासियों, ट्रक ड्राइवरों, महिला सेक्स वर्करों और ट्रांसजेंडर समुदायों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं। एचआईवी से जुड़े मिथकों और तथ्यों को दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री और अधिकारियों के निर्देश
कुरुक्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर (DC) विश्राम कुमार मीना ने बताया कि कुरुक्षेत्र इस स्टेटस को लगातार बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को बनाए रखने के लिए जागरूकता अभियानों को और तेज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को युवाओं, प्रवासी मजदूरों, ट्रक ड्राइवरों और अन्य उच्च जोखिम वाले समूहों के बीच विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों और कॉलेजों में ‘रेड रिबन क्लब’ के माध्यम से एड्स के प्रति भ्रांतियों को दूर करने और जांच के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया है। डीसी ने यह भी कहा कि एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं व मुफ्त चिकित्सा उपचार का पूरा लाभ मिलना चाहिए।

