Yuva Haryana: हरियाणा को पूरी तरह नशामुक्त बनाने और प्रदेश के युवाओं को नशे के दलदल से बचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर मुहिम शुरू की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसके लिए सात मुख्य संकल्पों पर काम करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
मंगलवार को ‘संकल्प सोसाइटी’ की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं का सही इलाज और पुनर्वास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हर महीने प्रस्तुत करनी होगी ठोस रिपोर्ट
सीएम नायब सिंह सैनी ने बैठक में कड़े निर्देश देते हुए कहा कि ‘संकल्प सोसाइटी’ को हर महीने अपने अभियानों के नतीजों और कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
सरकार इस बात का आकलन लगातार करेगी कि:
- नशे की उपलब्धता को कम करने में कितनी सफलता मिली है।
- युवाओं को इलाज और परामर्श से कितना जोड़ा जा सका है।
- इलाज के बाद युवाओं को दोबारा नशे की ओर लौटने से रोकने में अभियान कितना प्रभावी रहा है।
- मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस पूरी व्यवस्था में प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
क्या हैं सरकार के सात मुख्य संकल्प?
हरियाणा को नशामुक्त करने के लिए जिन सात प्रमुख प्राथमिकताओं पर कार्य किया जा रहा है, वे हैं:
- नशामुक्त थाना क्षेत्र: हर पुलिस थाने के अंतर्गत क्षेत्र को पूरी तरह नशामुक्त बनाना।
- तस्कर मुक्त जिला: जिलों में नशे की सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करना।
- नशे की गोलियों से मुक्त केमिस्ट दुकानें: मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित व नशीली दवाओं की बिक्री रोकना।
- परिवारों का सहयोग: नशा विरोधी मुहिम में प्रभावित परिवारों को जोड़ना।
- इलाज की सुविधा वाले अस्पताल: पीड़ितों के बेहतर इलाज और पुनर्वास के लिए अस्पतालों की व्यवस्था।
- काउंसलिंग सुविधा वाले स्कूल: स्कूलों में युवाओं की काउंसलिंग व जागरूकता फैलाना।
- सकारात्मक अवसर: युवाओं को खेल कूद व अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना।
तस्करों के पूरे नेटवर्क पर कसेगा शिकंजा
मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केवल नशा बेचने वालों पर ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क और आपूर्ति (Supply Chain) के स्रोतों का पता लगाकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस को निष्पक्ष व प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
इसके साथ ही युवाओं को जागरूक करने के लिए मैराथन, साइक्लोथॉन और विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का सहारा लिया जा रहा है। इस अभियान में गृह, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत विभाग के साथ-साथ शिक्षकों, सामाजिक संस्थाओं और परिवारों से भी सहयोग की अपील की गई है।

