Yuva Haryana: हरियाणा में त्योहारों के सीजन में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम कसने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश में जांच व्यवस्था पूरी तरह लाचार दिख रही है। राज्य में खाद्य कारोबारियों और दुकानदारों की निगरानी के लिए महज 27 खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानकों के अनुसार, प्रदेश में प्रत्येक एक हजार खाद्य कारोबारियों पर एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात होना अनिवार्य है।
6 महीने में 182 सैंपल फेल: पनीर और छेना में सबसे ज्यादा मिलावट
वर्ष 2024-27 के 1 अप्रैल से 18 सितंबर तक लिए गए 163 खाद्य नमूनों के प्राथमिक परीक्षण परिणामों में 83 नमूने अधोमानक (Substandard) या असुरक्षित पाए गए हैं।
- पनीर और छेना के 23 सैंपल फेल पाए गए हैं।
- खोया (मावा) के 17 सैंपल फेल हुए हैं।
- दूध के 14 सैंपल फेल हुए हैं।
- दही व देसी घी के 13-13 सैंपल फेल पाए गए हैं।
- आइसक्रीम व कुल्फी के 12-12 सैंपल फेल हुए हैं।
- इसके अलावा सरसों तेल, बेसन, चक्की आटा, काजू, नमकीन और मिर्च मसालों के सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
प्रदेश की 2 प्रयोगशालाओं (Labs) के भरोसे खाद्य सुरक्षा
खाद्य पदार्थों की शुद्धता जांचने के लिए राज्य में केवल 2 लैब (करनाल और चंडीगढ़) मौजूद हैं। रिपोर्ट आने में होने वाली देरी के कारण मिलावटखोरों पर समय रहते शिकंजा कसना बेहद मुश्किल हो जाता है। हालांकि, अंबाला में नई लैब खोलने की योजना से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
5 सालों का आंकड़ा: 278 मामलों में सजा और लाख रुपये का जुर्माना
बीते 5 वर्षों में मिलावटखोरी के 278 मामलों में कोर्ट से सजा हुई है और कुल ₹55.86 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
वर्ष 2025-26 के दौरान मिलावट से जुड़े 2.35 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका गया, वहीं 1 अप्रैल 2025 से 30 जून 2026 के बीच निपटाए गए 1,742 मामलों में से 815 मामलों में ₹10 लाख से अधिक का जुर्माना वसूला गया है।
खाद्य पदार्थों में संभावित मिलावट और गड़बड़ी
पनीर: इसमें स्टार्च, डिटर्जेंट या दूषित पानी का इस्तेमाल किया जाता है।
दूध: पानी, डिटर्जेंट, यूरिया और हानिकारक केमिकल मिलाए जाते हैं।
घी: वनस्पति घी या सस्ते तेलों की मिलावट की जाती है।
खोया/मावा: स्टार्च, मैदा या डिटर्जेंट मिलाया जाता है।
मिर्च-मसाले: रंग, ईंट का चूरा और लकड़ी का बुरादा मिलाया जाता है।
सरसों का तेल: इसमें तरबूज या आरजीमोन के तेल की मिलावट की जाती है।
मिलावट न रुकने के 4 मुख्य कारण
- अधिकारियों की भारी कमी: राज्य में सिर्फ 27 खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं।
- दूसरे राज्यों से आपूर्ति: दिल्ली, पश्चिमी यूपी व पंजाब से भारी मात्रा में मिलावटी माल पहुंचता है।
- कार्रवाई से बच निकलते हैं कारोबारी: कानूनी खामियों और ढिलाई के चलते छोटे-बड़े कारोबारी बच निकलते हैं।
- जांच प्रक्रिया में लंबा समय: प्रयोगशालाओं की कमी के चलते जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है।
हरियाणा सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम
राज्य सरकार ने 45 नए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अंबाला में नई खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है।
त्योहारों को देखते हुए सघन जांच अभियान और फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए गए हैं।

