Yuva Haryana: पंचकूला के एक सरकारी स्कूल में छह साल की बच्ची के साथ हुई क्रूरता की घटना के बाद जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों की सुरक्षा के लिए 25 नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रसीजर (एसओपी) तैयार किए हैं। इन्हें सबसे पहले घटना वाले स्कूल में लागू किया जाएगा और इसके बाद जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अनिवार्य कर दिया जाएगा। जिला स्तरीय कमेटी ने इन दिशा-निर्देशों को अंतिम मंजूरी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेज दिया है।
एसओपी के प्रमुख प्रावधान
- स्कूल परिसर में पत्थर, लोहा, लकड़ी सहित चोट पहुंचाने में इस्तेमाल हो सकने वाली वस्तुएं नहीं रखी जाएंगी।
- सभी कक्षाओं के दरवाजों पर स्टॉपर लगाए जाएंगे।
- प्रिंसिपल सहित सभी शिक्षक सुबह की असेंबली में मौजूद रहेंगे।
- कक्षा में ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों के अलावा अन्य शिक्षक और प्रिंसिपल भी परिसर में बच्चों पर नजर रखेंगे।
- बच्चों को केवल पंजीकृत अभिभावक या अटेंडेंट को ही सौंपा जाएगा।
- ऑटो और टैक्सी चालकों को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा।
- बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखने पर अभिभावकों को सूचित किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पताल या बाल संरक्षण विभाग की मदद से काउंसलिंग कराई जाएगी।
- मिड-डे मील के दौरान क्लास टीचर बच्चों के साथ भोजन के लिए जाएंगी और उनके साथ ही वापस लौटेंगी।
- छुट्टी के समय शिक्षक बच्चों को अभिभावकों या अटेंडेंट को सौंपेंगे और गार्ड सभी कमरों की जांच कर ताला लगाएगा।
- जिस सीढ़ी से बच्चा ऊपरी मंजिल तक पहुंचा था, वहां लोहे की ग्रिल लगेगी।
- शिक्षकों की सुबह और लंच के बाद दो बार हाजिरी दर्ज होगी, ताकि बिना सूचना कोई परिसर से बाहर न जाए।
पीड़ित बच्चे का मेडिकल और काउंसलिंग
उधर, आठ साल के बच्चे का चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-32 जीएमसीएच में मेंटल असेसमेंट टेस्ट करवाया गया, जिसमें व्यवहार संबंधी समस्या सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे को लंबी काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट गोपनीय रखते हुए सीधे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) को भेज दी है। बोर्ड रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद बच्चे के पुनर्वास और कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
स्कूल को 50 से ज्यादा धमकी भरे ई-मेल
घटना के बाद पिछले पांच दिनों में स्कूल की आधिकारिक ई-मेल पर 50 से ज्यादा संदेश आ चुके हैं। इनमें अलग-अलग समुदायों के लोगों ने बच्चे की व्यक्तिगत जानकारी मांगी है, जबकि कुछ ने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। स्कूल प्रबंधन ने इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है, हालांकि अधिकारियों ने इस संबंध में कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया है।

