Yuva Haryana : हरियाणा में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले कारोबारियों पर अधिकारी केवल मामूली जुर्माना लगाकर खानापूरी कर रहे हैं। कम जुर्माने के कारण नियम तोड़ने वालों में कानून का डर खत्म हो रहा है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 30 जून 2026 तक राज्य में कुल 1,742 मामलों का निपटारा किया गया। इनमें से 895 केस (कुल मामलों का 51.4%) ऐसे थे, जिनमें 10 हजार रुपये या उससे भी कम का जुर्माना लगाया गया।
जुर्माने की स्थिति (मामलों का विवरण)
- 10 हजार रुपये तक जुर्माना: 895 मामले (4%)
- 10 हजार से 20 हजार रुपये जुर्माना: 237 मामले
- 20 हजार से 50 हजार रुपये जुर्माना: 395 मामले
- 50 हजार रुपये से अधिक जुर्माना: 215 मामले
जिलों की स्थिति: कहां हुआ कितना जुर्माना?
पंचकूला: जिले में निपटाए गए सभी 29 मामलों में 10 हजार रुपये या उससे कम जुर्माना लगाया गया।
फरीदाबाद: कुल 137 मामलों में से 131 केस में सिर्फ 10 हजार रुपये तक का दंड दिया गया।
सोनीपत: समीक्षा अवधि के दौरान 52 मामलों का निपटारा हुआ। इनमें से 37 मामलों (लगभग 71%) में केवल 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
गुरुग्राम व नूंह: नूंह में दर्ज 113 मामलों में से 45 केस और गुरुग्राम के 75 में से 32 केस में 50 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया।
अंबाला व पलवल: पलवल में 52 में से 44 और अंबाला में 39 में से 30 मामलों में 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया। इन दोनों जिलों और फरीदाबाद में 50 हजार से अधिक जुर्माने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
एफडीए आयुक्त ने जताई चिंता, दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मिलावटी, अमानक व गलत लेबल वाले खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर नाममात्र की कार्रवाई को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त डॉ. मनोज कुमार ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को पत्र भेजकर खाद्य सुरक्षा के मामलों में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
डॉ. मनोज कुमार ने स्पष्ट किया कि:
बिना पंजीकरण के कारोबार चलाने और गलत लेबल वाले खाद्य पदार्थ बेचने पर अपराध की गंभीरता के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 49 के तहत अनुचित लाभ, उपभोक्ताओं को नुकसान, बार-बार उल्लंघन और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखकर जुर्माना तय किया जाना चाहिए।
उद्देश्य यह है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी और कड़ा अंकुश लगाया जा सके, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

